उज्जैन. बीएड परीक्षा से वंचित एक निजी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने पहले महाविद्यालय प्रबंधन और बाद में विक्रम विश्वविद्यालय प्रशासन पर नाराजगी जाहिर की। परीक्षा के एक दिन पहले प्रवेश पत्र नहीं मिलने से विद्यार्थी खफा थे।
ऋषिनगर स्थित सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय में अध्ययनरत बी.एड. के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। परीक्षा 5 अक्टूबर को है लेकिन 4 अक्टूबर तक विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिले थे। रविवार को करीब 80 विद्यार्थी प्रवेश पत्र के लिए महाविद्यालय पहुंचे लेकिन उन्हें प्रवेश पत्र नहीं मिले।
इससे नाराज विद्यार्थियों ने पहले कॉलेज प्रशासन पर नाराजगी जताई और बाद में कॉलेज प्राचार्य स्मिता भवालकर के साथ विक्रम विवि के प्रभारी कुलपति डॉ. केदारनारायण जोशी से मिलने पहुंचे। डॉ. जोशी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए परीक्षा लेने से इंकार कर दिया। विद्यार्थियों का कहना है उन्हें अंधेरे में रखा गया। फीस के तौर पर 25 हजार रुपए लिए हैं।
बावजूद परीक्षा से वंचित रखा जा रहा है। सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्य स्मिता भवालकर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ही परीक्षाएं होंगी। प्रभारी कुलपति डॉ. जोशी के मुताबिक मुझसे प्राचार्य मिलने आई थीं। इससे ज्यादा जानकारी नहीं है। कॉलेज प्रबंध समिति के बालकृष्ण ठाकुर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में केस लगाया है। मंगलवार को पुटअप होने की उम्मीद है। राजस्थान के ग्राम कोट पुतली के बाबूलाल यादव के मुताबिक प्रवेश देते समय ही विद्यार्थियों को जानकारी देनी थी। अब विद्यार्थी भटक रहे हैं।