Ujjain
गेट टूटे, नहीं रोक पा रहे पानी
भास्कर न्यूज Monday, October 05, 2009 08:23 [IST]  

उज्‍जैन. जलसंकट के भीषण दौर से गुजरने के बाद भी न तो जल संसाधन विभाग ने सबक लिया न ही पीएचई ने। लापरवाही और अनदेखी का आलम अभी भी जस का तस है। संभागायुक्त और कलेक्टर गंभीर डेम से पानी की चोरी पर भले ही चिंतित हों लेकिन मातहतों के माथे पर शिकन नहीं है। लापरवाही का नजारा रामघाट के समीप बने स्टॉपडेम पर देखा जा सकता है।



शिप्रा नदी में रामघाट के पास रपट और बड़े पुल के बीच बना स्टॉपडेम पानी नहीं रोक पा रहा। कहने को तो डेम के गेट लगा दिए हैं लेकिन इतने सुराख हैं कि पानी बह रहा है। डेम में 25 गेट हैं। अधिकतर की हालत दयनीय है। बड़े गड्ढे हैं। जोड़ भी खुले हैं। स्टॉपडेम नाममात्र का रह गया है। पानी रोकने की क्षमता नहीं बची है।



रामघाट पर सालभर तीर्थयात्रियों, स्नान पर्वो, सोमवती अमावस्या पर हजारों लोग स्नान करते हैं। कार्तिक और वैशाख में रोजाना श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। रामघाट पर पर्याप्त पानी रहे इसलिए गऊघाट और भूखी माता स्टॉपडेम से ओवरफ्लो होने के बाद पानी को इस स्टॉपडेम में सहेजा जाता है। जलसंकट के दौर में पहली बार रामघाट पर भी शिप्रा जलविहीन हो गई थी। इन हालातों से गुजरने के बाद भी अधिकारी नहीं चेते हैं।



जिम्मेदार कौन?



इसकी देख-रेख की जिम्मेदारी नगर निगम अधीन पीएचई की है। इसके पहले जल संसाधन विभाग देख-रेख करता था। हाल ही में इसे निगम को हैंडओवर किया है। जल संसाधन विभाग यह कहकर जिम्मेदारी से हाथ झटक रहा है कि हमने निगम को सौंप दिया है। पीएचई का कहना है कि जल संसाधन विभाग ने जैसे गेट दिए हैं वे ही लगाए हैं। यानी दोनों ही विभाग जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं।



जिम्मेदार बोले



स्टॉपडेम रखरखाव के लिए नगर निगम को सौंप दिया है। उन्हें ही इसकी देख-रेख करनी है।



डी.सी. झाला, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन



जल संसाधन विभाग ने जिस स्थिति में गेट दिए हैं वे ही लगाए हैं। सुधारने के निर्देश दे दिए हैं।



वी.के. शिंदे, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

 
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: