जोधपुर. बेटा-बेटी एक समान है। यह सच सिर्फ नारों से नहीं समझा जा सकता, इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे। परंपरागत धारणा को बदलना पड़ेगा। ऐसी ही कुछ भावना के साथ सोमवार को लिंग निर्धारण एवं लैगिंग भेदभाव मिटाने के लिए सोमवार को होटल घूमर में दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। पहले दिन वक्ताओं ने कहा कि समाज में पढ़ा-लिखा तबका ही पुत्र मोह से ग्रसित है।
खुले-आम भ्रूण हत्या हो रही हैं, निजी अस्पतालों और लैबों में लिंग परीक्षण हो रहा है, इसे रोकना होगा। कार्यशाला राजस्थान यूनिवर्सिटी वुमन एसोसिएशन (रूवा), युनाइटेड नेशन्स पोपुलेशन फं ड की ओर से अनुदानित व जेएनवीयू के महिला अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हो रही है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ज्योति मीनावत ने कहा कि समाज को बहू-बेटियों के साथ खड़े होकर कन्या जीवन बचाने में भूमिका निभानी चाहिए।
आज शिक्षित वर्ग ही पुत्र मोह से नहीं उभर रहा। उन्होंने कहा कि नारेबाजी से ही काम नहीं चलने वाला, हमें परंपरागत मानसिकता को बदलना होगा। मुख्य अतिथि जोधपुर महापौर डॉ.ओमकुमारी गहलोत ने कहा कि महिलाओं के साथ पुरुषों का भी उतना ही दायित्व है कि वे लैंगिक असमानता को रोकने में कदम बढ़ाए। विशिष्ट अतिथि जुगल काबरा ने कहा कि नारी में इतनी शक्ति है कि वह अपने निर्णय स्वयं ले सकती है।
वह पुत्र-पुत्री की परंपरागत मानसिकता से समाज को उबारे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. लाड कंवर जैन ने रूवा की गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज लै¨गक निर्धारण के वैज्ञानिक व तकनीकी यंत्रों के आ जाने से खतरा बढ़ गया है। हम इनके खिलाफ नहीं है किंतु गर्भपात को रोकना या भ्रूण हत्या को रोकना संस्था का मकसद है।
कार्यक्रम में इस अवसर पर सुशीला बोहरा, आशा बोथरा सहित कई समाजसेविकाएं मौजूद थीं। कार्यशाला का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। अतिथियों का पूनम बावा ने स्वागत किया। संचालन डॉ. कैलाश कौशल ने किया। रूवा की सचिव बीना अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।