जोधपुर. कंप्यूटरीकृत इंजन मरुराज के बिना चालक पटरी पर दौड़ने के मामले में रेलवे प्रशासन लीपापोती में जुट गया है। वह इसे महज एक हादसा ही मान रहा है। अफसरों का कहना है कि इंजन टर्निग पर था और अचानक स्लिप हो गया। रेलवे प्रशासन ने अपनी प्रारंभिक जांच में फिलहाल दो रेलकर्मियों को ही दोषी माना है, शेष को डच्यूटी पर ले लिया गया। मामला मुख्यालय तक नहीं जाए, इसके लिए सीनियर सेक्शन इंजीनियर को भी 24 घंटे में ही दोष मुक्त कर दिया गया।
अवकाश से लौटे वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (डीजल) पुष्कर सिंगला हादसा घटित होने के 48 घंटे बाद भी दोषी रेलकर्मियों के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दे पाए। सिर्फ इतना ही कहा कि सीनियर सेक्शन इंजीनियर सुमेरसिंह का इसमें कोई रोल सामने नहीं आया। मौके पर काम कर रहे दो रेलकर्मियों (टर्नर) को ही निलंबित किया गया है। निलंबित रेलकर्मियों का नाम पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि याद नहीं है।
कई सवाल अनसुलझे
रेल प्रशासन भले ही इस प्रकरण को महज हादसा ही मान कर रफादफा करने के प्रयास में हो लेकिन कई सवाल ऐसे हैं जो अनुत्तरित हैं। मसलन अगर यह महज एक हादसा था तो रेलकर्मियों को इसकी जानकारी देरी से क्यों मिली? अगर जानकारी थी तो रेलकर्मियों ने कंट्रोल को इसकी जानकारी तत्काल क्यों नहीं दी?
डच्यूटी पर तैनात प्वाइंट्समैन ने इंजन के आगे व पीछे की ओर लकड़ी के गुटके क्यों नहीं लगाए? इन अनसुलझे सवालों का जवाब अफसर क्यों नहीं दे पा रहे हैं। जानकार सूत्रों का मानना है कि कंप्यूटरीकृत इंजन मरुराज में हैंड ब्रेक बाहर की तरफ दिया गया है जबकि अन्य इंजन में यह ब्रेक चालक के समीप ही होता है। संभवतया इसी गफलत में यह हादसा घटित हो गया।
अस्पताल में भर्ती हो गया चालक
आठ घंटे की डच्यूटी पूरी होते ही ट्रेन छोड़कर जाने वाले चालक को निलंबन की भनक लगी तो वह अस्पताल में जाकर भर्ती हो गया। उल्लेखनीय है कि डीएमटी ट्रेन को मेड़ता से नोखा लेकर जा रहा चालक अमरचंद आठ घंटे की डच्यूटी पूरी होते ही इंजन को बीच रास्ते में छोड़कर चला गया था। उसने अपने मोबाइल का स्विच भी ऑफ कर दिया था।