Jodhpur
विधायक कोटे से आवंटित मकान का सौदा
मनोज शर्मा Tuesday, October 06, 2009 07:34 [IST]  

जोधपुर. डूंगरपुर की आसपुर सुरक्षित सीट से कांग्रेस विधायक राईया मीणा जोधपुर में धोखाधड़ी कर एक व्यक्ति से तीस हजार रुपए ऐंठने के मामले में फंस गए हैं। उन पर राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर के दो अधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचने व भ्रष्टाचार का भी आरोप है। मामला जोधपुर के कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड में विधायक कोटे से राईया मीणा को आवंटित मकान के बेचान व अवकाश के दिन बोर्ड की ओर से विधायक के नाम भौतिक कब्जा संबंधी दस्तावेज बनाने से जुड़ा है।



धोखाधड़ी का शिकार व्यक्ति मामला दर्ज कराने हाउसिंग बोर्ड थाने गया, लेकिन नामजद आरोपियों के विधायक का नाम देखकर पुलिस ने परिवादी को टरका दिया। कोर्ट के निर्देश पर आखिरकार छह दिन बाद पुलिस ने विधायक व दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। उधर, विधायक का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई सौदा नहीं किया। प्रकरण का अनुसंधान जयपुर मुख्यालय ने सीआईडी (सीबी) की जोधपुर शाखा को सौंपा है।



पुलिस ने टरकाया



सुधीर का आरोप है कि इस मामले की रिपोर्ट दर्ज करवाने वह सीएचबी थाने गया था, लेकिन पुलिस ने उसे टरका दिया। इस कारण उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बाद में अदालत के निर्देश पर पुलिस ने दस सितंबर को विधायक राईया मीणा और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के एस्टेट मैनेजर (अज्ञात) व इंजीनियर अशोक भाटी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420,162 व 120 तथा भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा- 9 के तहत मामला दर्ज किया।



मकान बनने से पहले बेचान



कांग्रेस विधायक राईया मीणा ने वर्ष 2003 में जोधपुर में कुड़ी भगतासनी स्कीम हाउसिंग बोर्ड की स्कीम के तहत विधायक कोटे से उच्च आय वर्ग का मकान आवंटन के लिए आवेदन किया। मकान का ढांचा (प्लिंथ) आवंटन के बाद विधायक ने हाउसिंग बोर्ड में तीस हजार रुपए का ड्राफ्ट जमा कराया।



इससे पहले 3 अगस्त, 06 को ही इस मकान का सौदा विधायक ने कुलदीप नगर निवासी सुधीर शर्मा से कर लिया। एग्रीमेट के समय विधायक जो तीस हजार रुपए बोर्ड में जमा करवाए थे वह राशि सुधीर ने विधायक को दे दी। शपथ पत्र में मकान का आवंटन सुधीर के नाम करना तय हुआ।



छुट्टी के दिन बने दस्तावेज



इस बीच, विधायक और सुधीर के बीच सौदा बिगड़ गया। गत चार सितंबर को विधायक ने बोर्ड अधिकारियों की मदद से मकान के ढांचे (प्लिंथ) भौतिक कब्जे संबंधी दस्तावेज अपने नाम करवा लिए।



चौंकाने वाला तथ्य यह है कि यह दस्तावेज उस दिन बने जिस दिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईआरएस राजशेखर रेड्डी के असामयिक निधन के कारण राज्य में राजकीय शोक एवं सरकारी अवकाश था। कब्जा दस्तावेज बनने की जानकारी मिलने पर परिवादी ने पहले विधायक से संपर्क किया और फिर पुलिस व न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

 
 


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