उज्जैन. महिलाएं करवाचौथ का व्रत अपने सुहाग की दीर्घायु और खुशहाल दाम्पत्य जीवन के लिए करती हैं। बुधवार (7 अक्टूबर) को चतुर्थी पर महिलाएं दिनभर व्रत रखेंगी। रात में शिव-पार्वती का पूजन करने के साथ चौथ माता की कथा सुनेंगी और चंद्रमा निकलने पर पूजन के बाद करवे का जल लेकर भोजन ग्रहण करेंगी। कई जगह सामूहिक पूजन भी होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार चतुर्थी (9 घटी, 4 पल) अर्थात 10 घंटे 2 मिनट रहेगी, जो बुधवार को प्रात: 10.30 से प्रारंभ होकर रात 8.30 बजे तक रहेगी। करवाचौथ पर्व कर्णयोगाहा, भरणी नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ 32 साल बाद आ रही है। इसके पहले यह योग 1977 में बना था। बुधवार दोपहर १२.१क् बजे गुरु मार्गी होंगे और 3.15 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा, जो चंद्र दर्शन तक प्रभावशील रहेगा।
चंद दर्शन- पंचाग के मुताबिक बुधवार को चंद्र दर्शन शाम करीब 7.40 पर होगा। व्रत का पूर्ण लाभ लेने के लिए महिलाएं रात 10.30 बजे बाद चंद्र पूजन करें क्योंकि इस समय चंद्रमा 13 से 16 कला में होता है। ज्योतिषीय गणना में चंद्र पूजन इन्हीं कलाओं में श्रेष्ठ माना गया है।
चंद्र पूजन- ऋग्वेद की कंडिका 22 में श्लोक है (चंद्रमा मनसो जात:चक्षु सूर्योअजायत:) अर्थात- चंद्रमा मन-स्वास्थ्य और सूर्य नेत्र-आत्मा के कारक माने जाते हैं। करवाचौथ व्रत का मन, स्वास्थ्य व आत्मा तीनों से संबंध है। इसी कारण महिलाएं चतुर्थी पर पूजन कर चंद्रमा को अघ्र्य देती हैं।