जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने आयकर रिटर्न के ऑनलाइन फाइलिंग के वेरिफिकेशन को बंगलुरु भेजने की व्यवस्था को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर केन्द्र एवं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नई दिल्ली को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। सीए गौतमचंद बैद ने अधिवक्ता पंकज कुमार बोहरा व नीरज जैन के जरिए हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका पेश की थी।
इसमें बताया गया है बोर्ड के परिपत्र संख्या 3/2009 के प्रावधानों से ऑनलाइन रिटर्न बिना डिजिटल साइन के करने पर रिटर्न का वेरिफिकेशन साधारण डाक से बंगलुरु भेजना अनिवार्य हो गया है। इस कारण से कर-दाताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
याची की ओर से हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि बोर्ड का परिपत्र करदाताओं के हितों के विपरीत, आयकर अधिनियम के प्रावधानों व बोर्ड के स्वयं के निर्धारित मापदंडों और आयकर विभाग की ओर से जारी सीटीजन चार्टर के विपरीत है। यदि करदाता को वेरिफिकेशन बंगलुरु भेजने के बावजूद किसी भी तकनीकी या डाक अथवा आयकर विभाग की त्रुटी के कारण पावती नहीं मिलती है तो रिटर्न फाइल किया हुआ नहीं माना जाएगा।
हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश नारायणप्रसाद माथुर एवं मीना वी.गोम्बर ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई कर विपक्षीगण भारत सरकार एवं केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को 5 अक्टूबर को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब-तलब किया है।