जोधपुर. रणथंभौर व सरिस्का में बाघों को बचाने के प्रयास के तहत इन इलाकों के गांवों को खाली करवाया जा रहा है। वर्तमान में कुल 35 गांव इन दोनों अभयारण्यों में बसे हैं। इनमें से तीन को खाली करवाया जा चुका है। शेष को खाली करवाने की कवायद जारी है। प्रमुख शासन सचिव (वन) बी.एल.आर्य ने बुधवार को पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान यह जानकारी दी।
चीते को जैसलमेर छोड़ने के बारे में उन्होंने बताया कि इसको लेकर कुछ दिक्कतें पेश आ रही हैं जिसका निर्णय एनडीपी में नहीं हो पाया है। चूंकि नेशनल डेजर्ट पार्क में गोडावण भी रहते हैं, लिहाजा चीते को लाने में कुछ परेशानी आ रही है। इसके अलावा गोडावण को बचाने के लिए भी केन्द्र सरकार को प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया है।
वन भूमि पर हुए कब्जों के नियमन के सवाल पर आर्य ने कहा कि यह मामला कंजरवेशन एक्ट में आता है। ऐसे में इस पर आवश्यक निर्णय लेने का अधिकार केन्द्र सरकार को ही है। उन्होंने बताया कि माचिया सफारी पार्क को लेकर एक दशक से चल रही कागजी कार्रवाई अब जल्द थम जाएगी और शीघ्र ही माचिया योजना का कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वन विभाग में नए गार्ड्स की भर्ती का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है जिस पर शीघ्र ही कार्रवाई होगी।