रतलाम. जून, 1996 के एक मामले में अन्नपूर्णा थाने के तत्कालीन टीआई जितेंद्रसिंह भदौरिया को कोर्ट की तल्खी झेलनी पड़ी। श्री भदौरिया अभी रतलाम के बिलपांक थाने में पदस्थ हैं। एक मामले में लगातार 10 पेशियों पर उपस्थित नहीं होने वाले टीआई जितेंद्रसिंह भदौरिया पर न्यायिक दंडाधिकारी मूसा खान ने एक हजार रुपए जुर्माना लगाया और 15 हजार रुपए की जमानत पर उन्हें छोड़ा।
पिछले गुरुवार को पेशी के दौरान न्यायाधीश ने टीआई को जमकर डपटा भी। अन्नपूर्णा थाने में टीआई रहे श्री भदौरिया वर्तमान में रतलाम के बिलपांक थाने में पदस्थ हैं। न्यायिक दंडाधिकारी ने टीआई को डपटते हुए कहा कि आप पढ़े-लिखे और कानून के रखवाले हैं। फिर पेशी पर क्यों उपस्थित नहीं हो रहे थे।
न्यायालय ने भविष्य में टीआई को पेशी पर उपस्थित होने के आदेश भी दिए। न्यायाधीश ने सेवानिवृत्त एएसआई बी.पी. विद्रोही के उपस्थित नहीं होने पर भी नाराजी जताई। इस मामले में कोर्ट ने आईजी संजय राणा के माध्यम से श्री विद्रोही की गिरफ्तारी कर कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। श्री विद्रोही पूर्व में अन्नपूर्णा थाने में पदस्थ थे।
यह था मामला- 12 जून 1996 को प्रजापतनगर के मकान नं. 670 डी पर जबर्दस्ती ताला लगाने के मामले में मकान मालिक व अभिभाषक श्रद्धानंद मिश्र ने संबंधित थाना क्षेत्र के टीआई श्री भदौरिया व बीट इंचार्ज श्री विद्रोही के खिलाफ न्यायालय की शरण ली थी। श्री भदौरिया पेशी पर उपस्थित नहीं हो रहे थे तब 25 अगस्त को फरियादी की निशानदेही पर कोर्ट को वारंट तामील कराना पड़ा था।
गुरुवार को श्री भदौरिया पेशी पर आए थे। इस संबंध में टीआई श्री भदौरिया ने ‘भास्कर’ को बताया किसी न किसी कारण से मैं कोर्ट में हाजिर नहीं हो सका। कोर्ट ने एक हजार रु. का मुचलका जब्त करने के आदेश दिए हैं।