Lifestyle
द पॉवर ऑफ इनर इंजीनियरिंग
Bhaskar News Friday, October 09, 2009 01:44 [IST]  

इनर इंजीनियरिंग, डिक्रीजिंग वर्क कैपिसिटी, स्ट्रैस, कॉलेज और पर्सनल लाइफ में बैलेंस मेंटीनेंस न होने से स्टूडेंट्स का स्टडी से कॉन्सन्ट्रेशन बिगड़ रहा है। कुछ इन्हीं वजहों को ध्यान में रखते हुए साइंटिफिक वे में उन्हें किसी भी सिचुएशन को हैंडल करने और स्ट्रॉन्ग डिसीजन लेने के हुनर अब सिखाए जाने लगे हैं। स्टूडेंट्स भी सेल्फ इम्प्रूवमेंट के लिए कुछ खास तरह के नॉन रिलीजियस प्रोग्राम जॉइन करने लगे हैं। साथ ही वॉलेंटियर की तरह काम कर दूसरे लोगों की भी इनर इंजीनियरिंग कर रहे हैं।

एक्टिवेशन ऑफ एनर्जी

दरअसल ये कोई धार्मिक प्रोग्राम नहीं है बल्कि इसमें स्टूडेंट्स बिना किसी एक्स्ट्रा एफर्ट के एक्टिव रहने की कला सीख जाते हैं। कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहे गौरव गोस्वामी वॉलेंटियर हैं। वे कहते हैं, साइंटिफिक वे में जो क्रियाएं हमें सिखाई जाती हैं उनके एडवांटेज न सिर्फ पर्सनल लाइफ में मिलते हैं, बल्कि स्टडी में होने वाली प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशन तक पहुंच पाना इससे आसान होता है। किसी भी सिचुएशन के बारे में पहले से ही अवेयर हो जाते हैं। ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं कि मैं इस प्रोग्राम से जुड़ा हूं बल्कि कुछ बदलाव मैंने अन्दर से महसूस किए हैं। मुझे अपनी स्टडी और पर्सनल लाइफ में टाइम मैनेजमेंट की प्रॉब्लम थी। प्रैक्टिस के बाद उन पर मैंने कमांड कर ली है।

वर्क कैपिसिटी को कर सकते हैं ग्रो

जैसे बाहर की चीजों को इंजीनियर करते हैं वैसे ही हमारी अन्दर की चीजों को भी इंजीनियर किया जा सकता है। यह कहना है एमएनआईटी में आर्किकेक्चर स्टूडेंट सोनल पारख का। उन्होंने बताया, स्टूडेंट किसी भी फील्ड का क्यों न हो उसे टायर्डनैस को मेंटेन करना आना चाहिए। इस प्रोग्राम के दौरान स्टूडेंट्स को न सिर्फ टायर्डनैस को इम्प्रूव करना सिखाया जाता है बल्कि वर्क कैपिसिटी को ग्रो करना नेचुरली उनमें आता जाता है।

 
 


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