जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल में आने वाले स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को मेडिकल आईसीयू में रखा जाएगा। बीते दस दिन में स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों की एक के बाद एक तीन मौत होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने यह फैसला किया है।
अस्पताल का कहना है कि संदिग्ध गंभीर मरीजों के उपचार में किसी भी तरह की चूक नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। मरीजों को आईसीयू में भर्ती करने से यहां उपलब्ध संसाधनों को लाने ले जाने की परेशानी भी नहीं होगी और मरीजों का उपचार सुचारु हो सकेगा। उधर, गुरुवार को संदिग्ध मरीज नहीं आने से डॉक्टर्स ने राहत की सांस ली है।
अस्पताल में अभी तक सात पलंग वाले ओइसोलेशन वार्ड में संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया जा रहा था, लेकिन वार्ड में उपकरणों सहित अन्य संसाधनों का टोटा है। भर्ती मरीजों के लिए गैस सिलेंडर, वेंटीलेटर, मल्टीपैरा मीटर सहित दूसरे उपकरण इधर —उधर से जुगाड़ कर उपलब्ध करवाए गए। आईसीयू में आवश्यक उपकरण व ऑक्सीजन पाइप लाइन स्थायी होने से किसी तरह की परेशानी से बचा जा सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को जयपुर से आई टीम को भी अस्पताल प्रबंधन ने आइसोलेशन वार्ड के लिए सरकार से अतिरिक्त उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए सूची दी थी।
एन—95 मॉस्क का टोटा
फ्लू के वायरस से बचने के लिए आवश्यक एन—95 मॉस्क का अस्पताल के साथ—साथ बाजार में भी टोटा बना हुआ है। अस्पताल प्रबंधन ने मॉस्क मंगवाने के लिए सरकार को पत्र लिखने के साथ—साथ अपने स्तर पर भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। पूर्व में अस्पताल में महज पांच एन—95 मॉस्क उपलब्ध हुए थे। गौरतलब है कि एन—95 मॉस्क मंहगा होने के साथ—साथ बचाव के लिए कारगर उपाय है। इसका उपयोग चार घंटे तक किया जा सकता है।
बचाव के छह उपाय
हल्का जुखाम व बुखार होने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे रोगी संक्रमण की चपेट में आ जाता है। प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए रोगी के साथ सामान्य व्यक्ति को निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
नियमित व्यायाम करें, इससे शरीर का सामान्य रक्त प्रवाह प्रतिरोध क्षमता बनाए रखता है। मीठे का प्रयोग कम करें, शक्कर से बनी चीजों से दूरी बनाएं। जंक फूड से दूरी बनाए। खास कर ठंड के दिनों में बच्चों के लिए यह नुकसान दायक हो सकता है। कम से कम सात घंटे नींद जरूर लें। तनाव से दूरी बनाए। असहज महसूस करने पर शरीर को पूरा आराम दे।
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को अब मेडिकल आईसीयू में ही भर्ती किया जाएगा। यहां उपकरण सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध है।
डॉ. प्रफुल्ल कच्छवाह, अधीक्षक मथुरादास माथुर अस्पताल