जोधपुर. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम शहर में संचालित हो रहे मैरिज प्लेसेज के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के प्रति उदासीनता बरत रहा है। ऐसे में मैरिज प्लेसेज सहित अन्य आयोजन स्थलों को नियमों में बांधने की बात तो दूर, उनका रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पाया है।
इस साल अब तक सिर्फ 14 मैरिज प्लेसेज के मालिक ही रजिस्ट्रेशन के लिए आगे आए। दीपावली के बाद शहर में सावों की धूम को देखते हुए भास्कर ने अब तक की प्रगति जानी तो हालात जस के तस नजर आए। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मैरिज प्लेसेज संचालक न तो पार्किग विकसित कर पाए न ही निगम उन्हें नियमों के दायरे में बांध पाया।
मैरिज प्लेसेज को नियमों के दायरे में बांधने के लिए हाईकोर्ट ने करीब डेढ़ वर्ष पूर्व निगम को उदयपुर नगर परिषद की तर्ज पर बायलॉज बनाने का आदेश दिया था। बायलॉज तैयार करने लिए जरूरी नियम बनाने को हाईकोर्ट ने निगम को छह माह की मोहलत दी थी, लेकिन तब तक उसे सर्वे करवा कर सशुल्क रजिस्ट्रेशन करने के लिए पाबंद किया था। इस अवधि में सवा सौ मैरिज प्लेस संचालकों ने ही 5 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करवाया। शेष लोगों ने न तो पैसा जमा करवाने में रुचि दिखाई न ही निगम प्रशासन ने उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की।
केवल कागजी कवायद
नगर निगम प्रशासन को हाईकोर्ट के आदेश की पालना की चिंता भी नहीं सता रही है। सवा साल पहले महापौर की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने मैरिज प्लेसेज के लिए जरूरी नियम तो तय किए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। नए सर्वे में सामने आए 237 मैरिज प्लेस संचालकों को नोटिस जारी कर रजिस्ट्रेशन करवाने की हिदायत भी दी गई, लेकिन निगम अफसरों के तबादले केचलते यह कार्रवाई भी ज्यादा रंग नहीं दिखा सकी। दस माह में सिर्फ 14 मैरिज प्लेस संचालक ही नियमानुसार रजिस्ट्रेशन करवाने आए।