जोधपुर. जेएनवीयू की सिंडीकेट की बैठक में परीक्षा पास करवाने के मामले में घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए प्रो. प्रकाशचंद्र अग्रवाल को सिंडीकेट ने निलंबित कर दिया। उधर, इतिहास विभाग के निलंबित शिक्षक डॉ. मोहनराम चौधरी को बहाल कर दिया।
बैठक गुरुवार को कार्यवाहक कुलपति संदीप वर्मा की अध्यक्षता में डॉ. राधाकृष्णन सभागार में हुई। एसीबी ने प्रकाश चंद्र को छात्रों से घूस लेते गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था। विश्वविद्यालय ने अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कक्षाएं लेने के अलावा उनसे सभी अधिकार छीन लिए थे।
एसीबी की रिपोर्ट पर गुरुवार को मामले को सिंडीकेट में पेश किया गया। इसमें उसके निलंबन पर मुहर लगा दी गई। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सिंडीकेट ने कुलपति को अधिकृत किया। सिंडीकेट की इस बैठक में इतिहास विभाग के निलंबित शिक्षक डॉ. मोहनराम को बहाल कर दिया गया है। उनके निलंबन के मामले में बैठक में चर्चा हुई और बाद में डॉ. चौधरी को बहाल कर दिया गया।
नियुक्ति पर लग गई मुहर
राज्य सरकार ने उदयपुर के शिशुपाल सिंह को प्रतिनियुक्ति पर जेएनवीयू के एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज का सहायक निदेशक नियुक्त किया है। उनकी इस नियुक्ति के बारे में भी सिंडीकेट में चर्चा हुई, इसमें प्रतिनियुक्ति को स्वीकार कर लिया गया।
नहीं थे दोनों शिक्षक प्रतिनिधि
यूनिवर्सिटी की सिंडीकेट में शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में चयनित शिक्षक डॉ. डूंगरसिंह खींची व डॉ. मूलसिंह राठौड़ का सिंडीकेट सदस्य के रूप में कार्यकाल बुधवार को समाप्त हो गया था। बैठक में दोनों शिक्षक प्रतिनिधि नहीं थे। इसीलिए प्रो. अग्रवाल के मामले में शिक्षक प्रतिनिधियों का पक्ष सामने नहीं आ सका।
सिंडीकेट की बैठक में ज्ञापन
बैठक के दौरान एबीवीपी के एक प्रतिनिधि मंडल ने महानगर मंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा के नेतृत्व में सिंडीकेट की बैठक में ज्ञापन सौंपा। उनकी सिंडीकेट से मांग थी कि दोषी शिक्षक को निलंबित किया जाए व विद्यार्थियों की सेशनल परीक्षा फिर आयोजित हो अथवा बोनस अंक दिए जाएं। इस मौके उनके साथ चंद्रवीरसिंह बड़ला, उगमराज धारू व कैलाश माहेश्वरी भी मौजूद थे।