बीकानेर. सरकार की मिड-डे-मील योजना के तहत बच्चों को पका-पकाया पोषाहार देने की व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। पोषाहार सप्लाई करने वाले वाहन चालकों की हड़ताल के कारण गुरुवार को स्कूलों में पोषाहार ही नहीं बंटा।
एनजीओ नंदी फाउंडेशन के तहत संचालित केन्द्रीय रसोईघर से शहरी क्षेत्र और आस-पास की 152 सरकारी स्कूलों के 19 हजार से अधिक बच्चों को पका-पकाया पोषाहार सप्लाई होता है। एक पारी विद्यालयों में सुबह साढ़े नौ बजे तथा दो पारी विद्यालयों में दोपहर की शिफ्ट में डेढ़ बजे लंच के समय पोषाहार पहुंचाने की व्यवस्था है।
पोषाहार की सप्लाई में लगे 18 वाहन चालकों ने भुगतान की मांग को लेकर गुरुवार को हड़ताल कर दी। हड़ताल के किसी भी स्कूल में पोषाहार नहीं पहुंचा, जिससे बच्चे स्कूल समय में भूखे ही बैठे रहे। वाहन चालकों को पिछले दो माह से भुगतान नहीं मिला है।
गुरुवार को हड़ताल की सूचना मिलते ही सीईओ जिला परिषद ने एनजीओ के प्रतिनिधि को बुलाकर जुलाई का आठ लाख और अगस्त माह के भुगतान का नौ लाख रुपए का चेक जारी कर दिया। इस भुगतान को लेकर एनजीओ के स्थानीय प्रतिनिधि भुगतान के लिए कई दिनों से जिला प्रशासन और जिला परिषद के चक्कर लगा रहे थे। एनजीओ को जुलाई माह का करीब आठ लाख रुपए का भुगतान तत्कालीन सीईओ ने जारी किया था लेकिन ट्रेजरी ने चेक वापस लौटा दिया।
गौरतलब है कि पोषाहार में बच्चों को दाल, रोटी, चावल, दलिया खाने को मिलता है। इसके भी दिन निर्धारित हैं। सप्ताह में एक दिन फल वितरण का भी प्रावधान है लेकिन बच्चों को फल कभी मिले ही नहीं। जिला परिषद ने अब इस मसले पर गौर किया है। स्कूलों में घटिया क्वालिटी का पोषाहार सप्लाई होने की शिकायतें भी कई बार मिल चुकी हैं।
रात को ही दे दी थी हड़ताल की सूचना
केन्द्रीय रसोई घर में कार्यरत रसोइयों ने बताया कि वाहन चालकों ने हड़ताल की सूचना बुधवार को ही दे दी थी। पूर्व सूचना मिलने के कारण रात को पोषाहार नहीं पकाया गया। उधर, हड़ताल की सूचना मिलने पर बुधवार से ही जिला प्रशासन हरकत में आया हुआ था। जिला कलेक्टर श्रेया गुहा ने जिला परिषद सीईओ और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक एस.एस.बिस्सा से इस मसले पर बातचीत भी की।
उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक को आवश्यक निर्देश दिए गए लेकिन गुरुवार को सुबह हड़ताल की सूचना मिलने पर प्रशासन भी सकते में आ गया। जिला कलेक्टर ने इस मसले को लेकर संबंधित अधिकारियों की खिंचाई कर डाली। उसके बाद तुरत-फुरत एनजीओ को चेक जारी किए गए।
कितने बच्चे खाते हैं पोषाहार
मिड-डे-मील के तहत पोषाहार खाने वाले बच्चों की संख्या को लेकर विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है। प्रारंभिक व माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों और एनजीओ की ओर से दी गई संख्या का मिलान करने के बाद भुगतान की कार्रवाई होती है लेकिन इसे लेकर हमेशा से ही विरोधाभास रहा है।
संख्या के मिलान में देरी होने से भुगतान में भी विलंब होता है। इस बार भी डीईओ माध्यमिक कार्यालय से संख्या समय पर नहीं पहुंची, जिसकी वजह से एनजीओ का दो माह का भुगतान अटक गया। स्थिति यह है कि पोषाहार कुल छात्र संख्या के हिसाब से सप्लाई होता है लेकिन स्कूलों में प्रतिदिन छात्रों की उपस्थिति में अंतर बना रहता है। स्कूलों से पोषाहार खाने वाले छात्रों की सूचना प्रतिदिन की उपस्थिति के हिसाब से जाती है, जो कि एनजीओ के आंकड़े से मेल नहीं खाती।
नंदी फाउंडेशन और ट्रांसपोटर्स के बीच समस्या थी। इसमें बच्चों का क्या दोष। एनजीओ की लापरवाही से बच्चों को भूखा रहना पड़ा है। मैंने राज्य सरकार को स्थिति से अवगत करवा दिया गया है। लिखित में भी सरकार को भेजा जा रहा है।
श्रेया गुहा, जिला कलेक्टर
नंदी फाउंडेशन का दो माह का भुगतान बकाया था। चेक जारी कर दिए गए हैं। हड़ताल के संबंध में कमिश्नर मिड-डे-मील को भी अवगत करवा दिया गया है। सरकार और एनजीओ के बीच एमओयू हुआ था। उसे भी देखा जा रहा है। फल नहीं देने का मामला भी सामने आया है।
बलवंत बिश्नोई, सीईओ, जिला परिषद
हमने 18 लोड बोडी टैक्सियां पोषाहार की सप्लाई में लगा रखी हैं। इनके चालकों की हड़ताल के कारण पोषाहार सप्लाई नहीं हो सका। भुगतान आज मिला है। शुक्रवार से व्यवस्था फिर से सुचारु हो जाएगी।
संजीव जॉर्ज, प्रतिनिधि, नंदी फाउंडेशन
मिड-डे-मील का उद्देश्य बदलने की जरूरत है। बच्चे केवल भोजन करने के लिए ही स्कूल पहुंचते हैं। सरकारी स्कूलों में मन लगाकर पढ़ना बच्चों का उद्देश्य रहा ही नहीं। ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों में तो पोषाहार खाने के बाद बच्चे घर चले जाते हैं।
भंवर पुरोहित, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिक्षक संघ शेखावत
मिड-डे-मील योजना की क्रियान्विति सही तौर पर नहीं हो पा रही है। बच्चों को घटिया क्वालिटी का खाना मिलता है। दाल और रोटी दोनों ही कच्चे होते हैं। जिला कलेक्टर को भी कई बार इस समस्या से अवगत करवाया जा चुका है लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।
रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री शिक्षक संघ (राष्ट्रीय)
केन्द्रीय रसोई घर से गुरुवार को किसी भी स्कूल में पोषाहार नहीं पहुंचा। बच्चों को भूखा रहना पड़ा। यह मानवाधिकार हनन की श्रेणी में आता है। इसके लिए एनजीओ को कड़ा दंड मिलना चाहिए।
विजय शंकर आचार्य, अतिरिक्त महामंत्री, शिक्षक संघ प्रगतिशील