नीमच. लेबड़-नयागांव फोरलेन को बने अभी एक माह ही हुआ लेकिन टैक्स तीन साल के मान से वसूला जा रहा है। इसमें जितने साल वाहन चालक सड़कों पर चले नहीं हैं उनका पथ कर उन्हें देना पड़ रहा है।
253 किमी लंबे फोरलेन का 31 किमी का काम पूरा होने से नयागांव में टोल-टैक्स शुरू हो गया है। पथ कर तीन साल पुराने गजट नोटिफिकेशन के आधार पर वसूला जा रहा है। हर साल 9 प्रतिशत की दर से 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई जो कि सीधे-सीधे लूट है।
गजट नोटिफिकेशन 31 दिसंबर 2003 को उस समय हुआ जब सड़क के टेंडर तक नहीं हुए थे तथा टैक्स 1 अप्रैल 07 के मान से वसूला जा रहा है। जिस समय फोरलेन बना नहीं था तो चालक उस मान से टैक्स क्यों दें लेकिन गजट नोटिफिकेशन को हथियार बनाकर टोल-टैक्स ठेकेदार लूट मचा रहे हैं।
इस मामले से जहां सड़क प्राधिकरण ने पल्ला झाड़ लिया है वहीं राज्य सरकार भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। राज्यपाल के राजपत्र में फोरलेन की दरें घोषित होने से सरकार भी कुछ करने की स्थिति में नहीं है। ये हालत केवल नीमच-नयागांव में नहीं बल्कि प्रदेश के उन फोरलेन मार्गो पर भी दिखेंगे जो हाल में बनकर तैयार हुए हैं। इनमें भोपाल-देवास, मंदसौर-सीतामऊ सहित पांच राजमार्ग हैं, जहां पुरानी दरों में ७ प्रतिशत की वृद्धि कर टैक्स वसूला जा रहा है।
नियम दरकिनार
बीओटी नियम के तहत न्यूनतम ४क् किलोमीटर मार्ग बनने के बाद ही टोल-टैक्स वसूला जाता है लेकिन नयागांव टोल-टैक्स नाके पर ३१ किमी पर ही टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है। यही नहीं टोल-टैक्स वसूलने से दर 15 दिन पहले घोषित करना थी लेकिन 11 सितंबर सुबह दर घोषित होते ही टैक्स वसूलना शुरू कर दिया गया। बोर्ड लगाने के 30 दिन बाद टैक्स लिया जाना था लेकिन इस नियम को भी अनदेखा कर दिया गया।
हाई कोर्ट पहुंचे समाजसेवी
मामले में शहर के समाजसेवी सुरेंद्र जैन हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने टोल दरों को चुनौती देते हुए विभिन्न बिंदुओं पर इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है जिस पर जल्द ही सुनवाई होगी।
जिस दिन से सड़क शुरू होगी उसी दिन से टोल लगेगा। यदि पहले से लिया जा रहा है तो ऐसा नहीं होना चाहिए। गजट नोटिफिकेशन में क्या था, देखने पर पता चलेगा। मैं इस मामले को गंभीरता से ले रहा हूं, जल्द ही स्थिति साफ करेंगे।
नागेंद्रसिंह , लोक निर्माण मंत्री, मप्र शासन
गजट नोटिफिकेशन में सभी शर्ते उल्लेखित हैं, उसी दर से टोल-टैक्स लिया जा रहा है। हमारे हाथ में अब कुछ नहीं है।
ए.एल. सूर्यवंशी, प्रबंधक, सड़क विकास प्राधिकरण, उज्जैन