Career
सामाजिक उद्यमिता की संभावनाशील राह
प्राची नायक Saturday, October 10, 2009 01:47 [IST]  

Careerएक दशक पहले तक कोई नया उद्यम चलाना फैमिली बिजनेस में जमे अमीर घरानों के बस की बात ही मानी जाती थी। लेकिन कुछ सालों के भीतर जबसे देश के कुछ अग्रणी शिक्षण संस्थानों ने हमारे सक्षम युवा उद्यमी मस्तिष्कों में रोजगार तलाशने वाला बनने के बजाय रोजगार प्रदाता बनने का विचार जगाने का जिम्मा संभाला है, यह परिदृश्य बदल गया है। आज ऐसे संस्थानों के प्रयास फलीभूत हो रहे हैं और तकरीबन हर कैंपस में उद्यमिता की चर्चा की जाने लगी है।



हालिया रुझान सिर्फ उद्यमिता ही नहीं, बल्कि इससे आगे भी कुछ करने की दिशा में नजर आते हैं। हाल ही में लांच नेशनल सोशल एंटरप्रेन्योरशिप फोरम (एनएसईएफ) के सह-संस्थापक राकेश अनुगुला का कहना है, ‘उद्यमिया का मकसद लाभ कमाने से है, लेकिन सामाजिक उद्यमिता समाज को फायदा पहुंचाने के साथ-साथ लाभ कमाने में भी मददगार है। मिसाल के तौर पर ग्रामीण इलाकों में कोई लाभ कमाने लायक सामाजिक उद्यम के बारे में विचार करें, जहां देश की साठ फीसदी आबादी निवास करती है। इसके जरिए आप खासी कमाई तो कर ही सकते हैं, आपको भावनात्मक संतुष्टि भी मिलेगी।’



अनुगुला जिनके बारे में बता रहे हैं, वह जांची-परखी अवधारणाएं हैं और जिन्हंे हाल के वर्र्षो में जबरदस्त सफलता मिली है। शहरी संचालन लागत को घटाने वाले ग्रामीण बीपीओ, गांव में रहने वाले गरीबों को छोटे-मोटे कर्ज की सुविधा उपलब्ध कराने वाले ग्रामीण बैंक और एसकेएस माइक्रोफाइनेंस जैसी माइक्रोफाइनेंस कंपनियां, मोबाइल मेडिक्स (एक चलित स्वास्थ्य सेवा) जैसे हेल्थकेयर संस्थान जो ग्रामीणों के लिए प्राइवेट सेक्टर से जुड़ी उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाते हैं, इस तरह के उद्यमों के कुछ उदाहरण हैं।



इसके साथ-साथ हमारे प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों से निकले छात्रों और समाज के मध्य जुड़ाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अब छात्र धीरे-धीरे ऊंची-ऊंची तनख्वाहों वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नौकरियों से बाहर की दुनिया भी खंगालने लगे हैं। अब वे अपने बलबूते सामाजिक उद्यम की सोच को अपना रहे हैं। छात्रों को इस दिशा में प्रोत्साहित व मार्गदर्शित करने के लिए एनएसईएफ ने हाल ही में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बीआईटीएस) पिलानी और आईआईएम लखनऊ (आईआईएम-एल) में सामाजिक उद्यमिता केंद्र (सीएसई) खोले हैं। इस फोरम की जनवरी से पहले देश के चार अन्य प्रमुख संस्थानों में भी इस तरह के केंद्र खोलने की योजना है। इसके अलावा अगले साल से एनएसईएफ सामाजिक उद्यमिता में दिलचस्पी रखने वाले प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा से जुड़े और भी संस्थानों को ऐसे केंद्र खोलने के लिए मदद करेगा।



सामाजिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सीएसई के जरिए उपरोक्त दोनों संस्थानों ने हाल ही में इससे जुड़ी कार्यशालाएं आयोजित की हैं, जिनमें एकलव्य एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक सुनील हांडा और स्वयं शिक्षण प्रयोग की संस्थापक व कार्यकारी निदेशक प्रेमा गोपालन जैसे उद्यमियों को भी आमंत्रित किया।



इस संदर्भ में आईआईएम-एल से जुड़े भमिदिपति भार्गव, जो सामाजिक उद्यमिता केंद्र के ई-सेल अभियान का हिस्सा है, ने कहा, ‘हमारी पहली वर्कशॉप में हमने देखा कि एमआईटी और व्हार्टन से आए छात्र सतत रूप से स्वयं शिक्षा प्रयोग की गतिविधियों से जुड़े हैं, लेकिन भारतीय छात्रों को यही पता नहीं कि वे इसमें कैसे योगदान दे सकते हैं।’ इसके अलावा आईआईएम-एल के कैंपस में नवंबर में एक बिजनेस प्लान कांपटीशन की तैयारी भी चल रही है, जिसमें छात्रों की प्रविष्टियां तो शामिल होंगी हीं, इसके अलावा इसमें भाग लेने के इच्छुक अन्य पेशेवरों के लिए भी द्वार खुले होंगे। इसमें जीतने वाली बिजनेस योजनाओं के लिए एनएसईएफ द्वारा पूंजीवादी उद्यमियों से गठजोड़ कर आर्थिक संसाधन जुटाए जाएंगे।



आगे की तैयारी



मैनेजमेंट व तकनीकी संस्थानों में छात्रों को जागरूक करने के लिहाज से सामाजिक उद्यमिता केंद्र स्थापित करना।दूसरों को सिखाने के लिहाज से उद्यमियों के साथ टाई-अप करना।सामाजिक उद्यमिता पर केंद्रित वर्कशॉप व प्रदर्शनियों का आयोजन।कारोबार की बेहतर योजना रखने वाले छात्रों या पेशेवर लोगों की फंडिंग के लिए पूंजीवादियों से संपर्क करना।



 
 


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