सीमाई क्षेत्र से. राजस्थान का राठ इलाका इन दिनों हरियाणा के चुनाव में रंगा हुआ है। राठ इलाके का हरियाणा से रोटी-बेटी का रिश्ता है। इसी रिश्ते के आधार पर इलाके के करीब ४क् गांव सीधे तौर पर हरियाणा विधानसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं। यहां के लोग भले ही राजस्थान में रह रहे हों लेकिन घर और चौपाल तक इन दिनों केवल हरियाणा में हो रहे चुनाव की चर्चा है। लोग उम्मीदवारों की जीत, हार और भावी सरकार पर बहस करते दिखाई दे रहे हैं।
हरियाणा का चुनाव राजस्थान के नेताओं के बिना अधूरा होता है, ऐसा ही हाल राजस्थान के चुनावों में भी देखने को मिलता है। यही कारण है कि इन दिनों जिले के दिग्गज जनप्रतिनिधि भी चुनावी समर में सक्रिय हैं और अपने प्रभाव वाले इलाकों में अपनी-अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क में जुटे हैं। हालत यह है कि ये जनप्रतिनिधि दिन में तो हरियाणा में सक्रिय दिखाई देते हैं और रात को राजस्थान में समीक्षा करते नजर आते हैं। शुक्रवार को अलवर भास्कर टीम जिले के उन गांवों में पहुंची जहां से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर है हरियाणा। सीमावर्ती गांवों के युवाओं के चेहरों पर हरियाणा में हो रहे विधानसभा चुनावों की चमक है। वजहमंदी के इस दौर में प्रदेश के युवाओं के लिए अल्पकाल के लिए ही सही रोजगार के द्वार खुल गए हैं।
जिले के काठूवास गांव के बस स्टैंड पर जहां आम दिनों में दस से बारह निजी गाड़ियां सवारियों का इंतजार करती थी, आजकल यहां एक भी गाड़ी दिखाई नहीं देती, क्योंकि सभी गाड़ियां नारनौल और अटेली विधानसभा में खड़े प्रत्याशियों के लिए प्रचार अभियान के लिए बुक हो गई हैंे। यही हाल जिले के कान्हावास और मांढ़ण गांवों का है। यहां से भी बड़ी संख्या में प्राइवेट वाहन हरियाणा में प्रचार करने के लिए गए हैं।
जिले के दक्षिणी छोर पर स्थित प्रदेश का आखिरी गांव है परतापुर। यहां से महज दो किलोमीटर दूर है हरियाणा का राता कलां गांव। ये गांव अटेली विधानसभा में सबसे बड़ा भी है और निवर्तमान विधायक नरेश यादव का पैतृक गांव। परतापुर के अस्सी वर्षीय बलबीर सिंह यूं तो राजस्थान के निवासी हैं और वे नहीं जानते, प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन है? लेकिन इनके जेहन में हरियाणा में १३ अक्टूबर को होने वाले चुनाव को लेकर खासी बेचैनी है। बलबीर सिंह कहते हैं- मेरी सारी रिश्तेदारी हरियाणा में ही है। रिश्तेदारों के कहने पर मैं भी पिछले दो दिनों से उनके साथ हरियाणा के कुछ गांवों में गया था। बलबीर सिंह के अनुसार चुनाव चाहे हरियाणा में हों या राजस्थान में, इलाके के लोगों की इसमें गहरी दिलचस्पी रहती है।