भीलवाड़ा. अंकेक्षण की भनक मात्र से पिछले एक सप्ताह में नरेगा मजदूरों को कई लाख रुपयों का भुगतान हो चुका है, जिनके वर्षो से खाते नहीं खुले थे, वे खुल गए, कितने ही ऐसे लोगों की सचाई सामने आ गई जिन्होंने काम किया ही नहीं, पर भुगतान हो गया। स्कूल के मास्टर से लेकर ऐसे लोगों के नाम भी पता लगे जो काम करने की स्थिति में ही नहीं हैं। इस तरह का कदम उठाने के लिए सरकार को बधाई दी ही जानी चाहिए।
वैसे तो अंकेक्षण हमेशा होता रहा है पर उसका तरीका सरकारी था। सरकार का अधिकारी रिकॉर्ड चेक करता है, कितना पैसा आया और कितना खर्च हुआ, उसके बिल हैं या नहीं। उसकी ज्यादा गहराई में जाने के लिए अब तक न तो किसी ने उन पर जोर दिया और न ही उन्होंने इसकी कोशिश की। पिछले एक सप्ताह से चल रहे अंकेक्षण ने जिले में पंचायतों की स्थिति को बदल कर रख दिया है। पंद्रह दिन पहले गांव-गांव में सरपंच जहां यह कहते फिर रहे थे कि नरेगा चलेगी तो किसी भी हालत में सरपंची नहीं छोड़नी, वे ही सरपंच अब ये कहने लगे हैं कि ऑडिट से बच जाएं, चाहे सरपंची चली जाए।
देश में पहली बार हुए इस कार्य में जिस तरह से राज्य और केंद्र सरकारें शामिल हो रही है उससे यह साफ है कि उनके स्तर पर भी भ्रष्टाचार समाप्त करने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। इस तरह का ऑडिट निश्चित रूप से एक ऐसा रास्ता बता रहा है जो नरेगा का नहीं बल्कि हर उस सार्वजनिक योजना को सार्वजनिक करने की ओर संकेत देता है जिस पर आज तक केवल चर्चा होती है, पर काम नहीं होता। अगर हर योजना का हर विभाग जनता को हिसाब देने लग जाए तो काफी हद तक भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है। एक बार फिर उन सभी कार्यकर्ताओं को बधाई जो दिन-रात गांव-गांव जाकर सच्चाई को कानूनी रास्ते तक पहुंचा रहे हैं, इस सच्चाई को सरकार के अफसर, गांव की जनता थोड़ा कम ही सही, पर जानती जरूर थी, कुछ कर नहीं सकती थी। अब उन्हें भी उम्मीद बंधी है कि उनका पैसा उनको ही मिलेगा, केवल नेताओं के मिलने वालों को नहीं।