उदयपुर. महाराणा प्रताप की भूमि पर पले, बड़े हुए सेना के शौर्यचक्र विजेता कैप्टन प्रशांतसिंह चुंडावत कहते हैं कि उन्हें गर्व इस बात का है कि वे वर्दी का मान रख सके। प्रशांत के नेतृत्व में छह फौजियों ने जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में सात आतंकवादियों को मार गिराया था। 19 मार्च से 20 अप्रैल तक चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान में बहादुरी का यह काम कर दिखाया, 15 अगस्त को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने उन्हें शौर्य चक्र प्रदान किया। यहां प्रतापनगर स्थित निवास पर एक विशेष भेंट में कैप्टन प्रशांत ने कहा कि उन्हें मित्रांे, परिचितों और रिश्तेदारों के ढेराें बधाइयां मिल रही है। उसके बावजूद उनके विनम्र, हंसमुख स्वभाव एवं मिलनसारिता में कोई कमी नहीं आई है।
शौर्यचक्र मिलने के बाद पहली बार अवकाश पर घर आए प्रशांत को उनके मित्र सम्मानित कराना चाहते थे। आडंबर से दूर रहने वाले इस फौजी ने किसी भी प्रकार का स्वागत—सम्मान लेने से इंकार कर दिया। उनके मित्रों को प्रशांत को शौर्यचक्र मिलने की काफी खुशी है। गुजरात एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड डीन डॉ. बीएस चुंडावत के अनुशासित जीवन का असर प्रशांत के चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देता है। यहां बीएन स्कूल से 12वीं तक शिक्षा और उसके बाद बीएन कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। एमए करने के लिए श्रमजीवी कॉलेज में एडमिशन लेते ही आर्मी से कॉल लेटर आ गया। 17 मार्च 2007 को 16 जाट इंफेंट्री बटालियन में कैप्टन पद पर कमीशन मिला था। प्रशांत युवा पीढ़ी के नौजवानों को नसीहत देते हैं कि उन्हें फौज की नौकरी में न जाना हो तो भी एनसीसी अनिवार्य रूप से ज्वाइन करनी चाहिए।