Udaipur
लौटा दिए 23 हजार लाइफ सेविंग इंजेक्शन
भास्कर न्यूज Saturday, October 10, 2009 03:45 [IST]  

उदयपुर. बड़े अस्पताल में सप्लाई हुए लाइफ सेविंग इंजेक्शन (सिफट्रियोक्सोन सोडियम) में फंगस होने का खुलासा होने के बाद शुक्रवार को 23 हजार इंजेक्शन इंदौर की कंपनी को लौटा दिए गए। विभिन्न वार्डो में भेजे गए इंजेक्शन भी वापस मंगवाए गए, लेकिन शाम तक सिर्फ सत्रह इंजेक्शन ही स्टोर में जमा हुए। इससे पहले गुरुवार को इन इंजेक्शनों के उपयोग व खरीद पर रोक लगा दी थी। ड्रग इंस्पेक्टर ने वितरक के बिलों की प्रतियां जब्त करके प्रतिष्ठान पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित कंपनी के अन्य उत्पादों की खरीद पर भी रोक लगा दी है।
दैनिक भास्कर में शुक्रवार को ‘आम आदमी की जान से खिलवाड़’ शीर्षक से प्रकाशित खबर के माध्यम से बड़े अस्पताल में वितरित इंजेक्शनों में फंगस होने का खुलासा किया था। इस पर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अस्पताल के स्टोर में जमा पंद्रह हजार और स्थानीय वितरक कुशाल डिस्ट्रीब्यूटर्स से आठ हजार इंजेक्शन जब्त कर कंपनी को लौटा दिए हैं। ड्रग इंस्पेटर ललित अजारिया ने स्टोर से बिल की प्रतियां जब्त करके प्रतिष्ठान पर निर्माता कंपनी से संबंधित सभी तरह की मेडिकल सामग्री की जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि गत 30 सितंबर को एक इंजेक्शन में कचरा मिला था और गुरुवार को सील बंद एक इंजेक्शन में फंगस पाई गई।



वार्डो से नहीं लौटे इंजेक्शन



स्टोर प्रभारी उदयलाल टांक ने गुरुवार को ही सभी वार्डो में इस कंपनी के इंजेक्शन के उपयोग पर रोक लगाने के आदेश देते हुए उपलब्ध इंजेक्शन वापस स्टोर में जमा कराने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार शाम तक सिर्फ 17 इंजेक्शन ही स्टोर में जमा हुए जबकि गत 2 अक्टूबर के बाद वार्डो में दो से ढाई हजार इंजेक्शन सप्लाई हुए हैं। साढ़े बारह रुपए का एक इंजेक्शनअस्पताल सूत्रों के अनुसार सप्लाई में इस कंपनी का इंजेक्शन साढ़े बारह रुपए प्रति नग से सप्लाई होता है, जबकि नामी कंपनी के इस कंटेंट के इंजेक्शन आज भी साठ से सत्तर रुपए में बिकते हैं। अस्पताल प्रशासन ने पहली बार इस कंपनी के इंजेक्शन कुछ महीने पहले ही सस्ता देखकर स्वीकृत किया था और वितरक ने कुल तीस हजार इंजेक्शन सप्लाई किए थे।

 
 


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