Udaipur
..तो दीवारें भी झूमकर वंदेमातरम गाती थी
नगर संवाददाता Saturday, October 10, 2009 03:53 [IST]  

sउदयपुर. नगर परिषद के दशहरा—दीपावली मेले में शुक्रवार रात को वीररस, श्रंगार और हास्य रचनाओं ने देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा। हास्य पर जहां लोगों की बत्तीसी खुली की खुली रह गई, तो वीररस ने युवाओं श्रोताओं को जोश ओ जज्बात से भर दिया। सरस्वती वंदना के बाद जब केकड़ी से आए शहनाज हिंदुस्तानी ने शहीदे आजम भगतसिंह को याद करते हुए ‘हुआ हुकम जब फांसी का तो, भगत¨सह यूं मुस्काया, बोला मां अब गले लगा लो, मुद्दत से मौका आया, तख्ते फांसी कूच से जब, कदमों की आहट आती थी, तो दीवारें भी झूम—झूम कर वांदेमातरम गाती थी.. रचना पढ़ी तो श्रोता भी वंदे मातरम बोल उठे। उनकी ‘अपने अश्कों से अपने घावों को धोती है, वो बैठी इस कौने में, भारत मां रोती है’ ने भी दाद बटोरी।
ब्यावर से आईं श्रंगाररस की कवयित्री नफीसा भारती ने ‘मेरे आंगन से जो उड़ता है परिंदा कोई, मैं दुआओं के लिए हाथ उठा देती हूं.., कदम बढ़ते हैं जब आगे तो राहें साथ रखती है, सदा मां-बाप की बूढ़ी निगाहें साथ रखती है..’ सुनाकर वाहवाही लूटी। पैरोडियों के लिए ख्यात उदयपुर मूल के और मुंबई से आए पंडित विश्वेश्वर शर्मा ने भी रंग जमाया।



आशीष अनल (लखीमपुर) ने अग्नि वर्षक शब्दों का प्रयोग किया, ‘हिंदू बहना की राखी मुस्लिम कलाई पर, इतिहास वाले वे पृष्ठ कहां खो गये, हमने तो अशफाक और हमीद माना तुम्हें, तुम कैसे इंडियन मुजाहिद्दीन हो गए, कितना तिरंगे को झुकाया जा चुका, आज से तिरंगा कहीं झुकेगा नहीं’ रचना पर पूरा पांडाल तालियों की गूंज से उठा। हास्य कवि सुरेंद्र यादवेंद्र (बारां) ने ‘इंटरनेट पर सगाई, इंटरनेट पर शादी, इंटरनेट पर ही डायवर्स हो गया, लड़का और लड़की दोनों खुश कि चलो इस बहाने, कम्प्यूटर कोर्स ही हो गया..’ पर हंसाया। धार के जानी बैरागी ने ‘शक्तिशाली राष्ट्र से शक्ति शाली शासक ने सर्वशक्ति शक्ति मांगी, यानी ओबामा ने हनुमानजी की तस्वीर टांगी, ओबामा तुम्हारी नैया निश्चित चलेगी, क्योंकि कलयुग में हनुमानजी की भक्ति ही फलेगी.. सुनाकर दाद पाई।



रतनगढ़ से आए हास्यकवि श्याम पाराशर ने मेवाड़ी की बहन मालवी में कविताओं का आस्वाद सुनाया। परिवार नियोजन, चुनाव के साथ ही ‘कुछ ही पैदा होते जगत में, अपना नाम कमाने को, बाकी सारे पैदा होते, केवल मरघट जाने को..’ पंक्तियों से तालियां बंटोरी। बदायूं से आए गीतकार कुंवर जावेद ने ‘हमारे देश की कश्ती के मांझियों को कुंवर, भंवर तो मिलते हैं साहिल नहीं मिलते, किसी भी जांच की तह में उतरके भी इनको, सुराग मिलते हैं, कातिल कभी नहीं मिलते, मजाक देखिये इससे ज्यादा क्या होगा, दुंरगे लोग तिरंगे की बात करते हैं..’
डॉ. राजीव शर्मा (इंदौर) ने गीता और कुरान में कोई बैर नहीं है, अशफाक के लिए भगतसिंह भी गैर नहीं है, रामायण कुरान व गुरुगं्रथ के संदेश में शांति का अमृत है कहीं जहर नहीं है..’ पंक्तियों पर वाहवाही पाई।



वीररस के ख्यात हस्ताक्षर हरिओम पंवार ने देश के मौजूदा हालात की ओर ध्यान खींचते हुए हरेक को सोचने पर मजबूर कर दिया। हमारे लोकतंत्र पर नाग की तरह फन फैलाए आतंकवाद, भ्रष्टाचार, राजनीति में अपराधियों के प्रवेश पर उन्होंने कटाक्ष कम नहीं किए। जब उन्होंने ‘मैं भारत का लोकतंत्र हूं, लाल किले से बोल रहा हूं, मैं जब से आजाद हुआ हूं, मैं ऊपर से हरा भरा हूं, संसद मैं सो बार मरा हूं’, ‘मैं ताजों के लिए समर्पण वंदन गीत नहीं गाता, दरबारों के लिए कभी अभिनंदन गीत नहीं गाता, गौण भले हो जाऊं, लेकिन मौन नहीं हो सकता मैं, पूत मोह में शस्त्र त्याग कर द्रोण नहीं हो सकता मैं’ रचना पढ़ी तो पांडाल देर तक करतल ध्वनि से गूंजता रहा। डॉ. राजीव शर्मा ने मंच संचालन की बागडोर संभाली। मुख्य अतिथि, प्रायोजक संस्था आरके मार्बल के विमल पाटनी थे। इस अवसर पर मेला संयोजक प्रमोद सामर, सांस्कृतिक समिति अध्यक्ष भैरूलाल मीणा, मेला समन्वयक गजेंद्र जैन, उपसभापति वीरेंद्र बापना आदि मौजूद थे।

 
 


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