Bikaner
पातेय वेतन पदोन्नतियां विवादों के घेरे में
भास्कर न्यूज Saturday, October 10, 2009 04:26 [IST]  

बीकानेर. शिक्षा विभाग ने राज्य के लगभग 13हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों को पातेय वेतन पदोन्नति देकर द्वितीय श्रेणी शिक्षक बनाया मगर ये प्रक्रिया अब विवादों के घेरे में आने लगी है। पदोन्नतियों में जहां कार्मिक विभाग के नियमों की अवहेलना की गई वहीं मनमर्जी का बोलबाला भी रहा है। सूचियां जारी होने के बाद भी पदस्थापन किए जा रहे हैं साथ ही कार्यभार ग्रहण कर चुके शिक्षकों का स्थान भी बदला जा रहा है। इससे शिक्षक वर्ग में रोष है और उन्होंने राज्यपाल व मुख्यमंत्री तक गुहार की है।



कार्मिक विभाग ने पदोन्नति के समान ही पातेय वेतन पदोन्नति करने की स्वीकृति दी है। कार्मिक विभाग के 16 सितंबर 2009 के आईडी के आधार पर शिक्षा ग्रुप-2 ने 18 सितंबर 09 को जो स्वीकृति आदेश जारी किया उसके बिन्दु एक में उल्लेख है कि पातेय वेतन पदोन्नति पर पदस्थापन पाने वाला राजसेवक पदोन्नति हेतु वरिष्ठता एवं पात्रता रखता हो जबकि वर्ष 2005 में नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षक 5वर्ष के अनुभव की पात्रता पूर्ण नहीं करते।



कार्मिक विभाग के इसी आदेश में उल्लेखित किया गया है कि उच्च पद पर लगाए जाने वाले राजसेवकों से अंडरटेकिेंग ली जावे कि वे भविष्य में उच्च पद पर कार्य करने संबंधि कोई परिलाभ लेने की मांग नहीं करेंगे। यह अंडरटेकिंग किसी से नहीं ली गई। इस प्रक्रिया में नियुक्ति नियमों की भी अनदेखी हुई है।



राजस्थान शिक्षा सेवा अधीनस्थ नियम 1971 में 18 जुलाई 2008 को हुए संशोधन के अनुसार पदोन्नति या सीधी भर्ती से हिन्दी, अंग्रेजी, तृतीय भाषा, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान विषयों के वरिष्ठ अध्यापक बन सकते हैं। पर उपनिदेशकों ने मा व उमा स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापक व उप्रा स्कूलों में प्रधानाध्यापक नाम से पातेय वेतन पदोन्नति पाने वालों को पदस्थापित किया है।



यह पदोन्नति पाने वाले कई शिक्षक कार्य ग्रहण नहीं करना चाहते और कार्मिक विभाग के आदेश का हवाला देते हैं पर उनके लिए कोई राहत तय ही नहीं की गई है। शिक्षक कह रहे हैं कि अंडरटेकिंग नहीं दे रहा हूं इसलिए वर्तमान स्थान से कार्यमुक्त नहीं किया जावे और यदि ऐसा किया जाता है तो मुझे उच्च पद के वित्तीय परिलाभ दिए जाएं। शिक्षकों में इन विसंगतियों को लेकर रोष है।



बदल रहे हैं आदेश



अनेक जिलों में पदस्थापन आदेश जारी होने के बाद भी बदले जा रहे हैं। कई जन प्रतिनिधि जहां इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि उनकी अनुशंसा के अनुसार पदस्थापन नहीं हुए तो शिक्षक इस बात से नाराज हैं कि उनसे जो पांच स्थान विकल्प के रूप में लिए गए उनमें से किसी पर लगाया ही नहीं गया है।



कुछ शिक्षकों की माध्यमिक व प्रारंभिक दोनों विभागों ने पातेय वेतन पदोन्नतियां कर दी है। ऐसे शिक्षक कहां कार्यभार ग्रहण करें यह असमंजस है। सूचियों में मनमर्जी का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि माशि निदेशक ने 29 सितंबर को टोंक की इस पदोन्नति सूची पर रोक लगा दी। टोंक, सीकर, चूरू जिलों में आदेश परिवर्तित हो रहे हैं। जोधपुर संभाग की सूची 29 सितंबर को जारी हुई और कार्यभार ग्रहण की तिथि 13 अक्टूबर दी गई जबकि अन्य स्थानों पर यह तिथि 9 अक्टूबर तय की गई।

 
 


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