बीकानेर. मेडिकल कॉलेज में बेटी के दाखिले के समय रैगिंग को लेकर थोड़ा चिंतित रहे महेन्द्रसिंह भारी अब कॉलेज का माहौल और बेटी को मिले अनुभव से काफी संतुष्ट हैं। वे कहते हैं, मेरी बेटी अंजू को कभी किसी ने तंग नहीं किया और कॉलेज में पढ़ाई का अच्छा माहौल मिल रहा है। कुछ ऐसा ही गार्जियन रुक्मणी बेनीवाल ने कहा, भले ही मेरा बेटा कॉलेज में फ्रेशर नहीं मगर वह रैगिंग लेने के पक्ष में भी नहीं।
कुछ ऐसे ही अनुभव शुक्रवार को सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में हुई एंटी रैगिंग कमेटी की मीटिंग में सामने आए। कॉलेज प्रशासन ने इस कमेटी का विस्तार करते हुए फ्रेशर, सीनियर स्टूडेंट्स के साथ ही फ्रेशर और सीनियर्स के परिजनों को भी इसमें शामिल किया है। कॉलेज के अतिरिक्त प्राचार्य डा.वी.के.जैन की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में पहली बार ये सभी प्रतिनिधि शामिल थे।
कमेटी की संयोजक डा.किरण वी.बरार ने रैगिंग रोकने के लिए अब तक किए गए उपाय बताते हुए कहा, फ्रेशर्स के परिजनों से नियमित तौर पर फोन पर संपर्क किया जा रहा है ताकि कोई शिकायत हो तो उनके माध्यम से भी सामने आ सके। अच्छी बात यह है कि अब तक रैगिंग की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है। अतिरिक्त प्राचार्य डा.जैन ने बताया, सभी सीनियर्स को यह समझा दिया गया है कि रैगिंग कानूनन जुर्म होने के साथ ही सामाजिक बुराई भी है। फ्रेशर्स के साथ छोटे भाई की तरह बर्ताव करें। सीनियर स्टूडेंट्स प्रतिनिधियों ने कहा, हम रैगिंग के पक्ष में नहीं है। परिचय जरूर होना चाहिए।
कॉलेज के पीएसएम विभाग के प्रोफेसर बी.एल.व्यास ने कहा, एमबीबीएस फस्र्ट का रिजल्ट जल्द ही आने वाला है। यह रिजल्ट आते ही फ्रेशर पार्टी आयोजित की जाएगी जिससे सीनियर और जूनियर्स के बीच अच्छा तालमेल बन जाएगा। एंटी रैगिंग स्क्वायड के डा.बी.पी.शर्मा, डा.एस.पी.गौड़ ने कॉलेज परिसर में हो रही नियमित चैकिंग की जानकारी दी। हॉस्टल इंचार्ज डा.संतोष खजोटिया व डा.जी.एल.मीणा ने भी हॉस्टल में बरती जा रही सतर्कता के संबंध में बताया। कॉलेज के मुख्य विधि सलाहकार अब्दुल रहमान पंवार ने बताया, रैगिंग अब सामाजिक बुराई ही नहीं कानूनन अपराध भी हो गया है।
सरकार ने तीन अगस्त को गजट नोटिफिकेशन के जरिये प्रिवेंशन एंड प्रोहिबिशन ऑफ रैगिंग इन मेडिकल कॉलेज/इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन एक्ट 2009 लागू कर दिया है। ऐसे में कोई भी स्टूडेंट रैगिंग करता पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मीटिंग में डा.आर.के.व्यास, डा.के.सी.माथुर आदि ने भी विचार व्यक्त किए।