पाली. वाहन बीमा के लिए यूं तो अनिवार्यता लागू है, लेकिन आमलोगों पर यह अनिवार्यता लागू करने वाली सरकार ने सरकारी वाहनों को इससे अनिवार्यता से अलग रखा है। इसके चलते सरकारी वाहनों से दुर्घटना में क्षतिग्रस्त होने वाले दूसरे वाहनों का हर्जाना ड्राइवरों को चुकाना पड़ रहा है। प्रभावित पार्टी द्वारा क्लेम की राशि चालक से ही वसूली जाती है। इस कारण चालक को मानसिक व आर्थिक परेशानी के दौर से गुजरना पड़ता है। वाहनों के इंश्योरेंस कराने की मांग को लेकर विभिन्न चालक संघों की ओर से समय-—समय पर आला अधिकारियों व मंत्रियों को पत्र भी लिखे जा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई।
प्रभारी मंत्री को सौंपा ज्ञापन
राजस्थान राज्य वाहन चालक एवं तकनिकी कर्मचारी संघ के बैनर तले सरकारी वाहनों के ड्राइवरों ने गुरुवार को जिले के प्रभारी मंत्री आमीन खां को ज्ञापन सौंपकर सरकारी वाहनों का इंश्योरेंस कराने की मांग की। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष हाजी तुफैल मोहम्मद ने बताया कि वाहनों का इंश्योरेंस नहीं होने के कारण क्लेम राशि का भुगतान उस वाहन के चालक को भुगतना पड़ता है। पूर्व में भी क्लेम राशि नहीं देने की स्थिति में सुमेरपुर में एक ड्राईवर आत्महत्या कर चुका है। इस दौरान वाहन चालक खीवसिंह, महेन्द्रसिंह, राजूसिंह, परमेश्वर सैन, मदनलाल, मोहम्मद नासिर सहित कई चालकों ने मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार की।