Pali
क्षणभंगुर है जीवन : दिव्यज्योति
भास्कर न्यूज Saturday, October 10, 2009 05:13 [IST]  

पाली.यह जीवन क्षण भंगुर है। संध्या के सूर्य और पानी के बुलबुले की तरह है, यह कब अस्तित्वहीन बन जाएगा इसका पता नहीं है। साध्वी दिव्यज्योति ने शुक्रवार को श्रीमद उत्तराध्ययन सूत्र का पारायण करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि साधक मृत्युभय से ग्रस्त न रहे अपितु अपनी क्षणभंगुरता को भी विस्मृत ना करे।



हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ अच्छा करने का सोचता ही है किंतु वह उसे प्राथमिकता देने में भूल कर जाता है। उन्होंने कहा कि मोह से मृत्यु के बाद आत्मा का पतन हो जाता है। वर्तमान जीवन में ही आसक्ति को छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जागृति का सूत्र देते हुए कहा कि सुख नश्वर है, ये ज्ञान हो तो उन्माद नहीं होगा और दुख भी नश्वर है यह भान हो तो अवसाद नहीं होगा, न कुछ मिलने पर फुलेंगे न बिछुड़ने पर रोएंगे, सब कुछ नश्वर है ये ध्यान हो तो प्रमाद नहीं होगा। संघमंत्री प्रकाशचंद कटारिया उत्तराध्ययन प्रoAपत्र प्रतियोगिता में अधिक से अधिक प्रतियोगियों से भाग लेने का आह्वान किया।

 
 


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