Jabalpur
छात्रा को परीक्षा में शामिल करो
भास्कर न्यूज Saturday, October 10, 2009 07:15 [IST]  

जबलपुर. प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के पास मान्यता न होने के कारण प्री-पीजी परीक्षा से वंचित हो रही एक छात्रा को हाईकोर्ट ने आज राहत प्रदान की है। चीफ जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस अजीत सिंह की युगलपीठ ने कहा है कि याचिकाकर्ता को परीक्षा में शामिल तो किया जाए, लेकिन उसका परीक्षा परिणाम बिना कोर्ट की अनुमति के घोषित न किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 नवम्बर को होगी।



इन्दौर की पूजा माथुर की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि उसने वहां के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस का कोर्स किया है। आवेदक के अनुसार उसने अगले साल होने वाली अखिल भारतीय स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन पत्र प्राप्त किया, लेकिन उसे परीक्षा में शामिल होने की अनुमति इसलिए नहीं मिल रही, क्योंकि प्रदेश के पांचों सरकारी मेडिकल के पास मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता नहीं है।



आवेदक के अनुसार पांचों मेडिकल को सूची से बाहर करने के कारण न सिर्फ आवेदक, बल्कि वे तमाम छात्र प्री-पीजी की प्रवेश परीक्षा से वंचित हो जाएंगे, जिन्होंने प्रदेश के पांच में से किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है। मामले पर विगत 6 जुलाई को हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका के अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। आज सुनवाई के दौरान आवेदकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी अग्रवाल और अधिवक्ता संजय अग्रवाल का पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की।

 
 


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