नई दिल्ली. पार्लियामेंट फोरम ऑन एचआईवी एंड एड्स के अध्यक्ष ऑस्कर फर्नाडिस की चली तो अब हर गर्भवती महिला को प्रसव से पहले एचआईवी टेस्ट कराना अनिवार्य होगा।
उनका कहना है कि किसी भी एचआईवी पॉजीटिव गर्भवती महिला से यह बीमारी नवजात शिशु में चला जाता है। यह मानव अधिकारों के खिलाफ है। इसीलिए सरकार इस तरह का कानून जल्द ही बना सकती है।
यूएनएड्स के एक समारोह को संबोधित करते हुए ऑस्कर ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को वैसे भी प्रसव से पहले एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए, पर ज्यादातर महिलाएं टेस्ट कराने से बचती हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। फर्नाडिस ने पूछा कि क्यों नवजात शिशु को उस गलती की सजा मिले, जिसे उसने किया भी नहीं है।
ऑस्कर ने बताया कि इस योजना को पंचायतों की सहायता से लागू किया जाएगा। ऑस्कर फर्नाडिस ने कहा कि यह योजना स्वास्थ्य मंत्रालय की जननी सुरक्षा योजना द्वारा लागू की जाएगी। सरकार की जननी सुरक्षा योजना स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय ग्रमीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एक योजना है, जो गर्भवती महिलाओं की बेहतर प्रसव के लिए काम करती है। यह संस्था प्रसव के दौरान जच्चा- बच्चा की मृत्यु दर कम करने की भी कोशिश करती है।
दूसरी तरफ नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी भी योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है। एक बड़े अधिकारी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को एचआईवी टेस्ट कराने की सलाह तो जरूर दी जाती है, पर उसे कानूनी तौर पर अनिवार्य बनाना संभव नहीं है।
फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय में इस तरह के किसी कानून के बारे में कुछ खास जानकारी ज्यादातर लोगों को नहीं है। आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 24 लाख लोग एचआईवी से पीड़ित हैं।
हर 39वीं महिला पीड़ित
आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 24 लाख लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। देश के हर 100 एचआईवी पीड़ितों में से 61 पुरुष और 39 महिलाएं हैं। 15 से 49 उम्र वर्ग के लोगों में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है।