Ganga Nagar
उपेक्षा का दंश झेलती संस्कृत!
Bhaskar News Sunday, October 11, 2009 01:01 [IST]  

हनुमानगढ़. जिले के राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में संस्कृत विषय के अध्यापकों के अधिकांश पद रिक्त होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है।



जिले के महज एक दर्जन विद्यालयों में ही संस्कृत विषय के अध्यापकों व व्याख्याता के पद भरे हुए हैं। एच्छिक विषय के रूप में पढ़ाए जाने वाले इस विषय को देश की देवनागरी लिपि की संज्ञा होने के बावजूद भी शिक्षा विभाग इस संबंध में उदासीन बना हुआ है।



जिले के अधिकांश राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों व व्याख्याताओं के रिक्त पदों से विद्यार्थियों को विशेषकर संस्कृत शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार 77 सीनियर विद्यालयों के सात विद्यालयों में एच्छिक विषय की स्वीकृति के बावजूद भी महज पांच विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसी प्रकार 162 सेकंडरी विद्यालयों में सीधी भर्ती के माध्यम से केवल आठ विद्यालयों में विषय अध्यापकों की नियुक्ति की गई है।




इन विद्यालयों में नियुक्ति: राजकीय सीनियर सेकंडरी विद्यालयों में नोहर, हनुमानगढ़ टाउन, भादरा, ललाना व पल्लू में संस्कृत विषय व्याख्याताओं को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा शेरड़ा व ललाना में विषय व्याख्याता का पद स्वीकृत होने के बावजूद भी खाली है।




इसी प्रकार सेकंडरी विद्यालयों में पांडूसर, रोड़ांवाली, संगरिया, हनुमानगढ़ जंक्शन, मंदरपुरा, ललानिया, बड़बिराना, डूंगराना व किराड़बड़ा में संस्कृत विषय अध्यापकों की नियुक्ति की गई है। खाली पद के कारण विद्यार्थियों को दूसरे विषयों के अध्यापकों का सहारा लेना पड़ रहा है। पिछले दो-तीन वर्षाें से संस्कृत विषय के क्रमांक भी 50 से बढ़ाकर अन्य विषयों के बराबर एक सौ अंकों का कर दिया है।

 
 


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