जोधपुर. दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के साथ ही घरों में दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिसके घर में सबसे ज्यादा रोशनी होती है, लक्ष्मी भी वर्ष भर उसी के घर में विराजमान रहती हैं। इसी धारणा के चलते दिवाली पर घरों को जगमग रोशनी से सजाने की परिपाटी सदियों से चली आ रही है।
इस बार भी मार्केट में घरों को रोशन करने लायक कई आकर्षक आइटम्स मौजूद हैं। दिवाली के मौके पर घर को जगमग करने के लिए लाइट वाली झालर, झूमर, कंडील तथा रंग-बिरंगे बल्ब कई तरह की आकर्षक डिजाइन्स और रंगों में आ गए हैं। इसके बावजूद दिवाली पर परंपरागत रूप से उपयोग में लिए जा रहे मिट्टी के दीयों का महत्व घटा नहीं है।
शास्त्रों में मिट्टी को शुद्ध माना गया है, तथा युगों युगों से लोग लक्ष्मी पूजन की थाली में दीपक सजाते हैं। घरों के अंदर भी मिट्टी के दीयों में तेल व रुई डालकर रोशनी का विधान सदियों से चला आ रहा है। वर्तमान में मिट्टी के दीयों के साथ मोम के दीपक भी प्रचलन में आए हैं। बिजली की रंगबिरंगी रोशनी से सजावट भी आम हो चली है, इसके बावजूद पूजा में तथा घरों के मुख्य स्थानों पर आज भी मिट्टी से बने दीपक से ही रोशनी की जाती है।
ऐसे में दीये के दिन भी फिरे हैं। मार्केट में अब मिट्टी के दीपक भी एक से बढ़कर एक डिजाइन में मिल रहे हैं। ड्रॉइंग रूम, आंगन कमरों के लिए खास तरह के दीपक मार्केट में मौजूद हैं। इन्हें अपनी सुविधा के अनुसार पानी के बॉउल और स्टैंड में सजाया जा सकता है। अब तो दिवाली क्या अन्य किसी भी ओकेजन पर घर में यह दीपक यूज किए जा सकते हैं। पानी से भरे एक बड़े बॉउल में तैरते हुए दीपक तो बहुत ही आकर्षक लगते हैं। आजकल लोग इन्हें वास्तुशास्त्र को ध्यान में रखते हुए यूज कर रहे हैं।