कोटा. दशहरा मेले में विजयश्री रंगमंच पर शनिवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने ओज और व्यंग कविताओं से देश की मौजूदा तस्वीर खींचते हुए राजनेताओं पर तीखे प्रहार किए। आतंकी ताकतों की भी खासी खबर ली। कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे अरूण जैमिनी ने अपनी काव्यात्मक टिप्पणियों से लोगों को खूब हंसाया।
‘नेताओं को देश से ज्यादा प्यारा लगे रूपय्या रे, जीत गए इलेक्शन अनाड़ी कबाड़ी, बन गए देश के नायक’ जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को अंदर तक झकझोर दिया। कवि सम्मेलन का आनंद लेने के लिए कोटा शहर समेत हाड़ौती के गांवों-कस्बों से लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा था। रात दस बजे कवि सम्मेलन की शुरूआत आगरा के मशहूर कवि सोम ठाकुर ने मां शारदे की वंदना से की।
अपनी ओजपूर्ण कविताओं से श्रोताओं के दिलोदिमाग को उद्वेलित करने वाले मेरठ के जाने माने कवि हरिओम पंवार के शब्दों की धार ने कवि सम्मेलन को ऊंचाइयां दीं। इंदौर के सत्यनारायण सत्तन, चित्तोड़ के नरेंद्र मिश्र, आगरा की ममता शर्मा, केकड़ी के शहनाज हिंदुस्तानी, कपासन के शंकर सुखवाल एवं कोटा के जगदीश सोलंकी, बालकवि आदित्य जैन और उदयपुर के बलवंत बल्लू ने अपनी कविताओं से श्रोताओं पर खासी छाप छोड़ी। जबकि कवि सम्मेलन की सूची में सिफारिश से शामिल हुए कवियों को श्रोताओं ने हूट कर दिया।
राजनेताओं पर जूते की गूंज
देश के राजनेताओं पर जूते फैंकने की घटनाओं पर बालकवि आदित्य जैन ने अपनी कविता में यूं अभिव्यक्त किया, ‘जूता बड़ा हो या छोटा नेताओं पर गिरती है गाज, जूते फेंकने का देश में चल पड़ा है रिवाज, छोटे से जूते का भी हो रहा बड़ा सम्मान’।