ग्वालियर. रक्षा मंत्रालय के अधीन रक्षा अनुसंधान तथा विकास स्थापना (डीआरडीई) के निदेशक ने जूनियर वैज्ञानिक के साथ हुई घटना को स्वीकार कर लिया है। निदेशक ने वैज्ञानिक को बलि देने के प्रयास के मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। उधर पुलिस ने रविवार को रक्षा विहार पहुंचकर जांच की और कुछ लोगों के बयान दर्ज किए।
डीआरडीई निदेशक डा. आर राघवन ने मामला सामने आने के दो दिन बाद एक विज्ञप्ति जारी कर वैज्ञानिक डॉ. सुशील शर्मा के साथ हुई घटना की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि घटना की जांच के लिए 7 अक्टूबर को एक जांच समिति का गठन कर दिया गया था। समिति में डा. बीके भट्टाचार्य, डा. जीपी शर्मा व डा. ओम कुमार को रखा गया है। यह समिति 28 अक्टूबर तक अपनी जांच रिपोर्ट देगी। विज्ञप्ति में डॉ. सुशील के 6 अक्टूबर की रात डा. एम कामेश्वर राव के घर जाने व डॉ. सुशील के चोटिल अवस्था में बाहर आने तथा उन्हें चिकित्सा सुविधा दिए जाने की बात भी कही गई है।
इस बीच विश्वविद्यालय थाने के उपनिरीक्षक उमेश गर्ग व कुछ सिपाही अमले के साथ रविवार की दोपहर फिर रक्षा विहार पहुंचे। पुलिस ने रक्षा विहार में डा. एएसबी भास्कर व गाडरें से पूछताछ की। डा. भास्कर ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह घटना के समय डॉ. कामेश्वर के घर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह जूनियर वैज्ञानिक डॉ. सुशील को जानते हैं, जो उनके अधीन कार्य कर रहे हैं। उन्होंने डॉ. सुशील को कुछ लापरवाह किस्म का व्यक्ति बताया।
झूठे विश्वास से बिगड़ती है मानसिक स्थिति:रक्षा वैज्ञानिक डॉ. सुशील शर्मा की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम. कामेश्वर राव द्वारा बलि दिए जाने के पAयास की घटना का कारण मनोचिकित्सक तंत्र-मंत्र में हद से अधिक विश्वास होना मानते हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. कमलेश उदैनियां का कहना है कि जैसा कि वैज्ञानिक डॉ. कामेश्वर के संबंध में पढ़ा व सुना, उसके अनुसार उन्होंने तंत्र-मंत्र की उपासना में अत्यधिक विश्वास कर विल्युजन की स्थिति में पहुंचकर यह कृत्य करने का प्रयास किया है। तंत्र-मंत्र में अत्यधिक विश्वास के कारण ऐसे लोगों को अच्छे-बुरे का भान नहीं रहता। ऐसी ही स्थिति में डॉ. कामेश्वर ने अपनी साधना सिद्धि के लिए बलि चढ़ाने के लिए डॉ. सुशील को बहाने से बुलाया। जब वह अपने प्रयास में सफल नहीं हुए और डॉ. सुशील ने विरोध किया तभी डॉ. कामेश्वर ने उनपर हमला किया होगा, और आक्रामक अवस्था में दांतों से भी काट लिया।
डॉ. कामेश्वर एक सप्ताह की छुट्टी पर :
पुलिस पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि आरोपी वैज्ञानिक डॉ. कामेश्वर 8 अक्टूबर से एक सप्ताह के अवकाश पर हैं। वह महाराष्ट्र स्थित अपने घर गए हैं। उनके निवास पर ताला लगा होने के कारण पुलिस अभी घर के अंदर की जांच-पड़ताल नहीं कर सकी है।