Udaipur
नहीं समझ आता एसएमएस का चक्कर
Bhaskar News Monday, October 12, 2009 04:01 [IST]  

उदयपुर. रियलिटी शो में एसएमएस से वोटिंग कर विनर बनाना, यह चक्कर समझ में नहीं आता।



वोटिंग के चक्कर में प्रतिभावान गायकों को निराशा ही हाथ लगती है, जिससे वे काफी हताश हो जाते हैं। यह कहना है प्लेबेक सिंगर बेला सुलाखे का। कहतीं हैं प्रभावी गायन, सिर्फ गायक पर ही निर्भर नहीं होता है गीत की सफलता बहुत कुछ म्यूजिक डायरेक्टर पर निर्भर करती है।




किशोर दा के साथ सुहाना सफर था : बेला सुलाखे ने बताया कि किशोर कुमार उन्हें बेटी की तरह मानते थे। उनसे स्टेज शो के दौरान संपर्क हुआ। अनुभव बांटे, उनके कहने पर फिल्म इम्तिहान में पहली बार चाहा तो बहुत.. गीत गाया। उसके बाद बतौर प्लेबेक सिंगर कई हिंदी, मराठी, बंगाली व भोजपुरी भाषा में गीत गाए। फिर लता मंगेशकर और आशा भौंसले से भी संपर्क हुआ। आशा जी के साथ तो कंसर्ट किया लेकिन लताजी के साथ गाने का सौभाग्य अब तक प्राप्त नहीं हो सका है।




रियलिटी शो में सब कुछ मैनेज : बेला कहती हैं रियलिटी शो में सब कुछ मैनेज होता है। निर्णायकों द्वारा झगड़ा करना व छोटी सी बात पर कहासुनी करना आदि सब कुछ पहले से तय होता है। प्राइवेट चैनलों द्वारा अपनी टीआरपी और एपीसोड को बड़ा करने के लिए पहले से रूपरेखा तैयार कर ली जाती है।



असल जिंदगी में सभी अच्छे दोस्त होते हैं, लेकिन इस मैनेज कार्यक्रम से एक प्रतिभावन कलाकार के साथ होने वाले अन्याय को कोई नहीं देखता है।



.. तो जनता विरोध करे : बेला कहतीं हैं जिन गानों में फूहड़ शब्दों का प्रयोग किया जाता है, मैं उन्हें गीत की संज्ञा नहीं देती। इस समस्या का सबसे बड़ा निराकरण यही है कि जनता खुद इसका विरोध करे।




सबसे फेवरिट परदेसी : बेला ने बताया कि उनके द्वारा अब तक गाए गीत में फिल्म राजा हिंदुस्तानी का गाना परदेसी, परदेसी जाना नहीं.. सबसे फेवरिट रहा। कवर वर्जन में गाया गीत यारा सिली सिली.. सबसे फेवरिट है। कहतीं हैं युवाओं को चाहिए कि वे नियमित रूप से अभ्यास करें, कभी न कभी वे अपनी मंजिल को पा लेंगे।

 
 


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