रतलाम. थोक मूल्य सूचकांक अब केवल शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता मूल्यों से तय नहीं होगा बल्कि ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों को मिलाकर इसे तैयार किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने डाककर्मियों का सहारा लिया है जो ग्रामीण क्षेत्रों के चुनिंदा गांवों में जाकर आवश्यक वस्तुओं का भाव इकट्ठा करेंगे। फिर अधिकारियों की देखरेख में इन्हें इंटरनेट पर एनएसएस (नेशनल सेम्पल सर्वे) की वेबसाइट पर लोड किया जाएगा।
इसके बाद इन भावों के आधार पर दिल्ली में थोक मूल्य सूचकांक तैयार होगा। यह सर्वे रतलाम सहित देश के 1183 डाकघरों में एक साथ होगा। डाककर्मियों द्वारा जिन वस्तुओं के भाव पूछे जा रहे हैं उनमें आटा, दाल, शकर, चाय, मसाले, सब्जी, चावल, साबुन, अंडे, मांस, मछली सहित करीब ५क्क् वस्तुएं शामिल हैं।
इसलिए किया गांवों को शामिल-मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे चले जाने के बावजूद महंगाई में कोई कमी नहीं आई है। इससे थोक मूल्य सूचकांक की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग गया था। विशेषज्ञ भी केवल शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों के आधार पर महंगाई व मुद्रास्फीति दर तय किए जाने को तर्कसंगत नहीं मान रहे थे इसलिए केंद्र सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक के लिए शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से उपभोक्ता मूल्य एकत्रित करने का निर्णय लिया जिसमें देश के गांवों शामिल किया गया।
ये है थोक मूल्य सूचकांक-केंद्र सरकार ने महंगाई दर और मुद्रास्फीति की दर तय करने के लिए जो इंडेक्स बनाया है। इसे थोक मूल्य सूचकांक कहते हैं। इसमें कई तरह की आवश्यक वस्तुओं को शामिल किया गया है जो महंगाई बढ़ने के साथ बढ़ता है और कम होने के साथ घटता है।
मासिक डाटा भेजेंगे
देश में अब ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों को मिलाकर थोक मूल्य सूचकांक तैयार होगा। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए डाक विभाग का सहारा लिया है। विभाग के निर्देश पर डाककर्मियों द्वारा सब्जी, अनाज सहित सभी वस्तुओं के भाव जुटाए जा रहे हैं। डाककर्मियों द्वारा हर महीने डाटा एकत्र कर भेजा जाएगा।
आई. एल. पुरोहित, पोस्टमास्टर मुख्य डाकघर रतलाम