भीलवाड़ा . इंदिरा गांधी सामुदायिक भवन में आयोजित सामाजिक अंकेक्षण की समीक्षा कार्यक्रम में रविवार को जनप्रतिनिधि अपनी बिरादरी के लोगों को पूरे समय बचाने में लगे रहे।
तीनों मंत्रियों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपने उद्बोधन में अंकेक्षण में सामने आई खामियों और कमियों के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार बताते हुए उनकी जमकर खिंचाई की। मंत्रियों ने सरपंचों से गबन की राशि वसूल कर छोड़ने की मंच से सिफारिश की।
जन प्रतिनिधियों के बचाव की शुरुआत वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रामलाल जाट ने की। जाट ने सरपंचों का बचाव करते हुए कहा कि जो मामले सामने आए हैं, वह उनकी अशिक्षा की वजह से है। पंचायतों में कर्मचारियों की कमी है।
जो जेईएन और सचिव प्लान तैयार करते हैं वही काम होता है। उन्होंने कहा कि कमियों और अनियमितताओं के लिए 90 प्रतिशत अधिकारी जिम्मेदार हैं जबकि 10 प्रतिशत गलती सरपंच की रहती है। उन्होंने कहा कि पूरा तंत्र ही बिगड़ चुका है। उन्होंने कहा कि एनजीओ ही घपला कर रहे उनका भी अंकेक्षण होना चाहिए।
जाट ने कहा कि दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों को जेल में डालना चाहिएऔर सरपंचों को सुधरने का मौका देना चाहिए।
जिले के प्रभारी मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि गांवों में भ्रष्टाचार नहीं है सरपंच को काम के विश्लेषण का ही पता नहीं है। उन्होंने भी सरपंचों को दिलासा देने के अंदाज में कहा कि यह प्रक्रिया किसी को दंडित करने के लिए नहीं है।
उन्होंने कहा कि गलती सुधारी जानी चाहिए। पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह ने कहा कि नरेगा में भ्रष्टाचार के लिए सीधे-सीधे अधिकारियों को दोषी ठहराया। उन्होंने फुटबाल मैच का उदाहरण देते हुए कहा कि रैफरी ही सीटी जेब में लेकर खड़ा हो जाए तो खिलाड़ी बेलगाम हो जाएंगे। उन्होंने भी अधिकारियों को मॉनीटरिंग की नसीहत दे दी।
अंत में केंद्रीय मंत्री डा. सीपी जोशी भी बचाव में आ गए उन्होंने समाजसेवी अरुणा राय की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि वे पुलिस में मामले दर्ज करवाने की बजाय सुधार को प्राथमिकता दें। सभी कागजी कार्रवाई की जगह उसमें सुधार लाने के प्रयास करने की बात कही।
ज्यादा लोकप्रिय होना खतरे की घंटी
हिंदी पत्रकारिता जगत के भीष्म पितामह प्रभाष जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा राज्य के पंचायतराज मंत्री भरत सिंह और कलेक्टर मंजू राजपाल को बढ़ती लोकप्रियता से सावधान रहने की सलाह दी। जोशी ने कहा जो ज्यादा सही काम करता है और जनता में लोकप्रिय होता है उसे चंद प्रभावशाली लोग सहन नहीं करते। उन्होंने महाराष्ट्र के लोकप्रिय कलेक्टर विनायक निपुण का उदाहरण भी दिया जो जनप्रिय था मगर उसका स्थानांतरण हो गया।