Ajmer
जांच सार्वजनिक हो
Bhaskar News Monday, October 12, 2009 05:02 [IST]  

अजमेर. सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में हुए बम विस्फोट की दूसरी बरसी पर रविवार रात अंदरकोट में आयोजित ताजियती जलसे में गम ओ गुस्सा नजर आया।



दो साल बाद भी मुल्जिमों का पता लगाने में नाकाम रही सुरक्षा एजेंसियों व सरकार की आलोचना की गई और मामले की जांच को सार्वजनिक करने की मांग की गई।




जलसे में वक्ताओं ने सरकार व सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। अंजुमन सैयद जादगान के पूर्व सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने जलसे में लोगों की कम तादाद पर अफसोस जाहिर किया। उन्होंने कहा कि एटीएस ने दरगाह मामले में जिन लोगोंे के नाम जाहिर किए हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।



काजी मुनव्वर ने कहा कि लगता है कि समय बीतने के साथ सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले की जांच में सुस्त पड़ गई हैं। आरुषि हत्या कांड की जांच सीबीआई से हो चुकी है, लेकिन दरगाह मामले की जांच अभी तक सीबीआई को नहीं सौंपी गई है। शेखजादा जुल्फिकार चिश्ती ने प्रशासन व दरगाह नाजिम पर दरगाह के गेट बंद कर मुसलमानों को आपस में बांटने की साजिश करार दिया।



उन्होंने सोलह खंभा, लंगर खाना व झालरा गेटों को खोलने की वकालत की। उनका कहना था कि जांच कहां तक पहुंच गई है, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जलसे में दारूल उलूम मोईनिया उस्मानिया के छात्रों ने कुरान ख्वानी की। अंत में तीनों मृतकों की मगफिरत के लिए दुआ की गई। जलसे में अंजुमन सैयदजादगान, शेखजादगान व पंचायत अंदरकोटियान के पदाधिकारियों समेत अनेक लोग उपस्थित थे।



मतभेद नजर आए



जलसे में कम तादाद को लेकर अंजुमन सैयदजादगान के पूर्व सचिव सैयद सरवर चिश्ती द्वारा व्यक्त किए गए अफसोस पर अंदर कोट के लोगों में नाराजगी नजर आई। मुनव्वर चिश्ती ने कहा कि यह सिर्फ ताजयती जलसा है। अहतिजाजी जलसा नहीं है। इसमें सभी समाजों के केवल प्रमुख लोगों को बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि जलसे में विभिन्न मस्जिदों के इमाम भी शरीक हुए हैं, केवल मदरसों के छात्र ही नहीं है।



पंचायत सदस्य व शेखजादगान पदाधिकारी नजर नहीं आए जलसे में पंचायत अंदर कोटियान के सदस्य व अजुमन शेख जादगान के पदाधिकारी भी नजर नहीं आए।

 
 


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