जबलपुर. सीएसपी ओमती संजय साहू के अनुसार पुलिस को सूचना मिली कि मुंबई से आए कुछ युवक इन्कम टैक्स चौराहे के समीप मारुति होटल व रसल चौक स्थित सम्राट होटल में रुके हुए हैं। इसी आधार पर एसपी अनंत कुमार सिंह व एएसपी मनीष कपूरिया के निर्देशन में पुलिस टीम ने छापा मारा और मारुति होटल के रूम नम्बर 202 से मो. शाजिद व मो. काशिम तथा इसी होटल के रूम नम्बर 102 में रुके उनके कुछ साथियों को हिरासत में लिया गया।
रसल चौक स्थित सम्राट होटल से भी काशिम व शाजिद के साथियों को पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान मौके पर हड़कम्प जैसी स्थिति बन गई। सीएसपी श्री साहू के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि शाजिद व काशिम अखबारों में विज्ञापन जारी करके लोगों से यह दावा करते थे कि वे खरगोश पालने का तरीका व व्यवसाय समझाकर उन्हें लाखों रुपए की कमाई करा सकते हैं। झांसे में आकर लोग जब आरोपियों द्वारा चाही गई राशि जमा करा देते तो वे चम्पत हो जाते थे। आरोपियों से ओमती थाना पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है।
होटल में ट्रेनिंग- पुलिस के अनुसार खरगोश पालने का व्यवसाय समझाने के लिए आरोपी युवकों ने रसल चौक स्थित सिद्धार्थ होटल के हॉल में बाकायदा ट्रेनिंग कैम्प चालू कर दिया था। यहां विभिन्न जिलों से आए कई युवक ट्रेनिंग भी ले रहे थे। इस कथित ट्रेनिंग के बाद आरोपियों का इरादा चम्पत हो जाने का था।
यह करते थे वादापुलिस के अनुसार आरोपी युवक अखबारों में विज्ञापन देकर यह दावा करते थे कि रैबिट फार्मिग की तकनीकी बताकर वे लाखों पैदा करा सकते हैं। इसके बदले लोगों से फार्म के बदले वे दो सौ रुपए लेते और फिर उनको बताते थे कि 22 हजार रुपए में उन्हें कम्पनी द्वारा 3 नर और 7 मादा खरगोश दिए जाएंगे। तीस दिन में हर मादा खरगोश 6 से 7 बच्चे देगी। उन खरगोशों को वे 100 रुपए प्रतिकिलो के भाव पर खरीद लेंगे। यह बिजनेस घर पर ही हो सकता है।
छतरपुर में भी की धोखाधड़ीपुलिस के अनुसार होटल में पकड़े गए युवकों ने कुछ माह पहले छतरपुर में भी खरगोश फार्मिग का मायाजाल फै लाया था। उन्होंने वहां के लोगों से लाखों रुपए बटोरे और फिर लापता हो गए। वहां की पुलिस को इन युवकों की तलाश है।
होटल में लिखाया गलत पता
बताया गया है कि पकड़े गए युवकों ने दोनों होटलों में खुद को फॉरगन व सन रैबिट फार्मिग कम्पनी का पदाधिकारी बताया तथा उन्होंने खुद को गोरेगांव मुंबई का निवासी लिखाया है। उन्होंने आने जाने का पता भोपाल का लिखाया है। इससे प्रतीत होता है कि युवक भोपाल के ही रहने वाले हैं।
आरोपियों पर हो कड़ी कार्रवाईगौसेवा आयोग के सदस्य डॉ. सुधीर अग्रवाल व वन्य प्राणी विशेषज्ञ मनीष कुलश्रेष्ठ का कहना है कि खरगोश फार्मिग का मामला तस्करी से भी जुड़ा है। आरोपी खुद स्वीकार रहे हैं कि उनके लोगों द्वारा पाले गए खरगोशों को किलो के भाव खरीदकर वे उनका मांस विदेशों में पहुंचाते हैं। उनका चमड़ा भी बेचते हैं। कार्रवाई इन बिन्दुओं को दृष्टिगत रखते हुए भी की जानी चाहिए।