कोलकाता/नई दिल्ली. अल्बानिया द्वारा मदर टेरेसा के पार्थिव अवशेष मांगे जाने की भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। सरकार व मदर टेरेसा की संस्था प्रतिक्रिया में बेहद सावधानी बरत रहे हैं, लेकिन कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने सरकार से आग्रह किया है कि अल्बानिया के आग्रह पर कोई भी फैसला करने से पहले चर्च तथा मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी से जरूर सलाह ली जाए।
अल्बानिया के प्रधानमंत्री सेली बेरिशा ने भारत से मदर टेरेसा तथा फ्रांस से राजा अहमत जोग के अवशेष मांगे हैं। बेरिशा ने कहा है कि मदर टेरेसा की जन्म शताब्दी अगले साल अगस्त में है उससे पहले ये अवशेष मिल जाने चाहिए। वैसे, अल्बानिया की राजधानी तिराना के मुख्य हवाई अड्डे का नामकरण मदर टेरेसा पर किया गया है।
मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार तथा 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनके संगठन की 123 देशों में 610 शाखाएं हैं। रोमन कैथोलिक धर्मगुरु पोप ने उन्हें धन्य घोषित किया है जो संत घोषित किए जाने की पहली सीढ़ी है।
वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से जब अल्बानियाई मांग के बारे में पूछा गया, उन्होंने कहा-यह मामला विदेश मंत्रालय से जुड़ा है आप उन्हीं से पूछिए। पश्चिम बंगाल के गृह सचिव अर्धेदु सेन ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य से अवशेष अल्बानिया भेजने को कहे इसकी संभावना ना के बराबर है। मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी की प्रवक्ता सिस्टर क्रिस्टी ने यह कहते हुए इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि अभी तक उनकी संस्था से किसी ने संपर्क नहीं किया है। प्रसिद्ध साहित्यकार व साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय की राय में ऐसी मांग कूड़ेदान में फेंक देनी चाहिए।
फिल्मकार गौतम घोष ने इस मांग को ओछेपन की हद बताया। उन्होंने कहा कि मदर टेरेसा ने पूरी जिंदगी कोलकाता में काम किया, वे भारतीय नागरिक थीं। वे कैसे उनपर दावा कर सकते हैं। वह भी आधिकारिक तौर पर?