नई दिल्ली. अनिल अंबानी के एडीए समूह द्वारा सुलह की पेशकश व मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा इस पर संदेह जताए जाने से स्पष्ट है कि दोनों भाइयों का विवाद जल्द निपटना मुश्किल है। जबकि, इससे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है।
आर्थिक संकट व दोनों भाइयों के विवाद के चलते सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से तेल व गैस की खोज के लिए प्रस्तावित 70 ब्लॉक में मात्र 37 के लिए ही बोली लगाई गई। हालांकि नेल्प (नेशनल एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी) के इस आठवें चरण में ओएनजीसी ने केंद्र को किरकिरी से बचा लिया।
उसने अकेले करीब 25 ब्लॉकों के लिए बोली लगाई। पेट्रोलियम सचिव आरएस पांडेय ने इतनी कम बोलियों के पीछे आर्थिक मंदी को वजह बताया। जबकि, हाइड्रोकार्बन निदेशालय के महानिदेशक वीके सिब्बल ने कहा कि मंदी के अलावा केजी गैस बेसिन को लेकर अंबानी बंधुओं में चल रहे विवाद को हल करने में सरकार की नाकामी से निजी कंपनियां की दिलचस्पी घटी है। कंपनियों का मानना है कि गैस की खोज का काम पहले ही काफी जटिल है, उस पर अस्पष्ट नीतियों से कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।
उदासीन रहा रिलायंस
ब्लॉकों की बोली लगाने में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज भी उदासीन रही। रिलायंस ने बोली में शामिल होने की औपचारिकता पूरी करते हुए मात्र एक ब्लॉक के लिए बोली लगाई।