नई दिल्ली. देश में ठेका प्राप्त करने के लिए आठ अमेरिकी कंपनियों ने नौसेना समेत कई सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी थी। इनमें भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार डाउ केमिकल भी शामिल है।
अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने पांच माह पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को इसकी जानकारी दे दी थी। भाजपा ने पीएमओ पर इस मामले में कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
अमेरिका में फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट और एंटी करप्शन इन्फोर्समेंट पर 11 मई को जारी रिपोर्ट में ये मामले उजागर हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने नौसेना, रेलवे, महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड जैसी अहम संस्थाओं से ठेके हासिल करने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देने की बात कबूली है। शंकर ने 12 मई को यह जानकारी पीएमओ को भेज दी थी।
कहां-किसे मिली रिश्वत
अमेरिकी कंपनी योर्क इंटरनेशनल कॉर्पेरेशन के भारतीय एजेंट ने 2001 से 2006 के बीच नौसेना के अफसरों को 1.32 लाख डॉलर की रिश्वत दी। डाउ केमिकल्स की सहायक डीई-नोसिल क्रॉप प्रोटेक्शन ने अपने तीन उत्पादों के पंजीयन के लिए कीटनाशक बोर्ड के अधिकारियों का दो लाख डॉलर की रिश्वत दी।
अन्य मामले मारियो कोविनो ऑफ कंट्रोल कंपनीज ने महाराष्ट्र बिजली बोर्ड को, वेबटेक ने अपने भारतीय उपक्रम पायोनियर फ्रिक्शन के जरिए भारतीय रेल के अफसरों को करीब डेढ़ करोड़ रुपए दिए। इसी तरह टेक्सट्रॉन इंक व एटीकेआई ने भी गैर कानूनी भुगतान की बात स्वीकारी है।
भाजपा ने उठाए सवाल : भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि इतने विस्तृत ब्योरे के बावजूद पीएमओ ने अब तक रिश्वत लेने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्वात्रोची को बचाने के सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में भ्रष्टाचार से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं बची है।