बीकानेर. आईजीएनपी द्वितीय चरण के 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फव्वारा सिंचाई पद्धति से फसलें लहलहाने का सपना पूरा करने की कवायद शुरू हुई है। पायलट प्रोजेक्ट का लक्षित काम लगभग पूरा हो चुका है और अब सिंचाई सिस्टम किसानों के हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शुरू हो गया है प्रशिक्षण का दौर।
कोटा के प्रशिक्षण संस्थान से आई 10 सदस्यीय टीम ने अलग-अलग विषयों पर इंजीनियरों को ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग का मकसद था सहभागी सिंचाई प्रबंधन के उद्देश्य और इस संबंध में बने अधिनियम की जानकारी देना, कृषक संगठन की प्रबंध समितियों के निर्वाचन एवं वापसी की प्रक्रिया समझाना, इन समितियों के कार्य, जल उपयोक्ता संगम (डब्ल्यूयूए) की कार्यप्रणाली बताना आदि।
दिनभर चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में त्रिलोक जैन, एच.एस.मीणा, वाई.डी.आर्य, राजसिंह राठौड़, दिनेश श्रीवास्तव आदि अधिकारियों-विशेषज्ञों ने अलग-अलग विषयों की बारीकियां स्क्रीन पर प्रेजेंट की। फव्वारा सिंचाई की खूबियां गिनाई, इससे होने वाली पानी की बचत और उत्पादन का जिक्र किया। इस टीम के सदस्यों ने सोमवार को जहां अभियंताओं को सहभागी सिंचाई प्रबंधन (पीआईएम) की बारीकियां समझाई वहीं अब कोलायत, गजनेर, पोकरण और फलोदी में किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगी। इन लिफ्ट क्षेत्र के लाभान्वित होने वाले किसानों को पूरी योजना समझाने के साथ ही समितियां गठित करने और पीआईएम संचालित करने के नियम-कानून भी बताए जाएंगे।