Shekhawati/ Sikar
हर दिवाली पर बीस लाख के पटाखे
Bhaskar News Tuesday, October 13, 2009 05:12 [IST]  

चूरू. हमारी थोड़ी सी सजगता असामान्य पर्यावरण को सुधारने में भागीदार हो सकती है।



दीपोत्सव जैसा पावन पर्व हमें यह मौका दे रहा है। बाजार के सर्वेक्षण के मुताबिक, पिछली दीपावली पर जिले में करीब बीस लाख रुपए के तेज धमाकेदार पटाखे फोड़े गए। खतरनाक पटाखे फोड़ने से महज एक रात में ही प्रदूषण दस गुना बढ़ गया।



दिवाली पर बाजार में मिलने वाले 95 फीसदी पटाखे तेज ध्वनि और वायु प्रदूषण के तय मानकों का उल्लंघन करते हैं। इनकी वजह से आम दिनों के मुकाबले दस गुना ज्यादा प्रदूषण और पंद्रह गुना अधिक ध्वनि प्रदूषण फैलता है। पर्यावरणविदों के अनुसार, दीपावली पर आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण की मात्रा 45 डेसीबल से बढ़कर दिन में 59 डेसीबल व रात में 64 डेसीबल तक पहुंच जाती है।



व्यापारिक क्षेत्र के प्रदूषण में 15 डेसीबल की बढ़ोतरी होती है। तय मानकों 65 व 55 डेसीबल से बढ़कर यह 78 व 72 डेसीबल पहुंच जाता है। संवेदनशील जगहों पर यह 50 व 40 डेसीबल से 56 व 80 डेसीबल तक पहुंच जाता है। आवासीय क्षेत्र के वायु प्रदूषण में सल्फर डाईआक्साइड (एसओटू) की मात्रा 22 से बढ़कर 56, एनओएक्स की मात्रा 69 से बढ़कर 90, आरएसपीएम की मात्रा 135 से बढ़कर 472 व एसपीएम की मात्रा 303 से बढ़कर सर्वाधिक 1190 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर हो जाती है।





पटाखों पर कोर्ट का रुख



सुप्रीम कोर्ट ने तेज आवाज वाले पटाखों को प्रतिबंधित कर रखा। इसके अलावा रात को 10 बजे से सुबह 6 बजे तक धमाके वाले पटाखे नहीं चलाए जा सकते हैं। पटाखे चलाने के लिए आवासीय इलाकों के लिए दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल ध्वनि की सीमा निर्धारित की गई है।

 
 


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