भीलवाड़ा. गाहें ढूंढ़ती रह गई, मानसून रूठकर मानो कोपभवन में चला गया। कार्तिक माह में कभी कंपकपी छूटने लगती थी, इसबार जेठ जैसी गर्मी से आगाज हुआ।
जानते हैं क्यों, क्योंकि हम पर्यावरण के प्रति इतने बेपरवाह हो गए कि अंजाम ही भूल गए। उसी का दुष्परिणाम है मानसून ने बेरुखी दिखा दी और मौसम में खतरनाक बदलाव आ गया। सूखे ने सारे सुख छीन लिए, लेकिन, रोज सुनते हैं सुबह का भूला यदि शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते।
यानी देर नहीं हुई है, हम शुरुआत करें पर्यावरण को बचाने की, उसकी हिफाजत करने की। खासकर तब जब हम अपनी जरा सी खुशी के लिए इस खतरे को नजरअंदाज कर रहे होते हैं। दैनिक भास्कर का हमेशा प्रयास रहा है कि वह ऐसे खतरे से सुधिजनों को आगाह करे, उनसे आग्रह करे, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे।
सामाजिक सोच की इसी भावना के तहत दैनिक भास्कर इस दीपावली पर्व पर शेखावाटी के पाठकों से विनम्र आग्रह करता है कि खतरनाक पटाखों से तौबा करें, उस एक रात को याद रखें, जो पटाखों के शोर और जहरीले धुएं से न जाने कितने दिन दम घोंटती रहती है।
आइए दिवाली की खुशियों को दीप जलाकर मनाएं। आपके इस प्रयास से पर्यावरण बचेगा, प्रतिकूल वातावरण में जी रहे लोगों की जिंदगी में रोशनी होगी और सही मायने में आप उन खुशियों में शामिल होंगे, जो भगवान राम के अयोध्या लौटने पर घी के दीए जलाकर मनाई गई थी।
-संपादक