अजमेर. राजस्थान लोकसेवा आयोग की मंशा के मुताबिक काम हुआ तो अब अराजपत्रित पदों पर भर्ती के लिए भी दो चरणों में संवीक्षा परीक्षा होगी।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय शिक्षा माफिया की जड़ें काटने के लिए आयोग इस व्यवस्था पर गंभीर विचार कर रहा है। आयोग शीघ्र ही इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजेगा।
आयोग सूत्रों के मुताबिक पिछली कुछ परीक्षाओं में शिक्षा माफिया ने आयोग की व्यवस्थाएं हिलाकर रख दी थी। न केवल सामूहिक नकल हुई बल्कि परीक्षा में मूल अभ्यर्थी की जगह अन्य अभ्यर्थी बैठने के मामले भी सामने आए।
परीक्षा व्यवस्थाओं में हालांकि संबंधित जिला प्रशासन की महžवपूर्ण भूमिका रही लेकिन प्रशासन भी अंतत: शिक्षकों पर ही निर्भर करता है। प्रशासन की इसी मजबूरी का लाभ शिक्षा माफिया ने उठाया। शिक्षा माफिया नागौर, सीकर, झुंझुनूं, जोधपुर, भरतपुर व जयपुर के कुछ क्षेत्रों में ज्यादा सक्रिय है। इसके मद्देनजर आयोग यह सोचने पर विवश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में योग्यता के आधार पर चयन कैसे हो?
इसके लिए आयोग का मानना है कि राज्य एवं अधीनस्थ सेवा के पदों के लिए होने वाली प्री और मुख्य परीक्षाओं वाली व्यवस्था ही अराजपत्रित पदों की भर्ती में भी लागू हो। प्रारंभिक में शिक्षा माफिया की कारस्तानी से कोई नकलची उत्तीर्ण हो भी जाए तो उसे दूसरे चरण की परीक्षा में मेहनत करनी होगी।
फिर पदों के निर्धारित मापदंड के मुताबिक आयोग मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों का चयन करेगा। ऐसे में कम विद्यार्थियों के लिए प्रमुख केंद्रों पर ईमानदारी से परीक्षा आयोजन में दिक्कत भी नहीं आएगी।
सरकार को भेजंेगे प्रस्ताव
ञ्चआयोग इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है ताकि अभ्यर्थी योग्यता के आधार पर चयनित हो। जल्दी ही राज्य सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सीआर चौधरी, अध्यक्ष, राजस्थान लोकसेवा आयोग