Ajmer
झगड़े की जड़ 2.64 करोड़ का भुगतान!
Bhaskar News Tuesday, October 13, 2009 05:32 [IST]  

अजमेर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रशासक और हाल ही में रिलीव कर जयपुर भेजे गए वित्त सलाहकार के बीच चले टकराव में यह तथ्य सामने आया है कि दोनों अफसरों के बीच मूल झगड़ा 2 करोड़ 64 लाख रुपए के भुगतान को लेकर था, जो कि 2009 की सालाना परीक्षा के प्रश्न पत्र छापने वाली फर्म का है।



मालूम हो कि परीक्षा के दौरान एक के बाद एक पर्चे आउट हुए थे और तत्कालीन प्रशासक ने निरीक्षण के दौरान इस फर्म की कई गंभीर लापरवाहियां पकड़ी थीं। वे चाहते थे कि तमाम लापरवाहियों की तमाम रिपोर्ट बने, उनक तर्क था कि रिपोर्ट फाइल पर आने के बाद ही भुगतान किया जाना चाहिए।




बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पूर्व प्रशासक एवं तत्कालीन संभागीय आयुक्त महावीरसिंह ने पर्चे आउट प्रकरण को देखते हुए प्रदेश के अनेक परीक्षा केन्द्रों, थानों, स्कूलों आदि का गहन निरीक्षण किया था।



उन्होंने थानों, शिक्षा अधिकारियों, स्कूलों आदि के स्तर पर बरती गई लापरवाहियां पकड़ने के साथ ही उस फर्म की भी गंभीर खामियां पकड़ीं जिस पर प्रश्न पत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केन्द्रों तक गोपनीयता बरतते हुए पहुंचाने का जिम्मा था। गोपनीय मुद्रक की जो गंभीर खामियां पकड़ीं उनमें ट्रकों की तिरपालें ठीक ढंग से नहीं बंधी होना, प्रश्न पत्रों के लिफाफों पर वैक्स सील ठीक ढंग से लगी नहीं होना, लिफाफों पर फ्लैप लगाने में गड़बड़ी आदि प्रमुख हैं।




वैक्स सील लिफाफों के जॉइंट की बजाय अन्य स्थानों पर पाई गई थी, जिससे लिफाफे खोलकर प्रश्न पत्र पार करने की आशंका थी। इन सब गड़बड़ियों और ऐसी अन्य खामियों के लिए प्रशासक महावीरसिंह ने बोर्ड के उप निदेशक (गोपनीय) जीके माथुर को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। गोपनीय फर्म का करीब 2 करोड़ 64 लाख रुपया भुगतान बकाया है। इसी भुगतान को लेकर खींचतान की शुरूआत हुई थी। बताया जाता है कि भुगतान से पहले एफए इंद्रराजसिंह यह तथ्य रिकॉर्ड पर लेना चाहते थे कि आखिर गोपनीय फर्म की कितनी गलतियां थीं।




अब टिप्पणी उचित नहीं



मेरा अब बोर्ड के प्रकरणों में टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, लेकिन एक बात जरूर कहूंगा। पर्चा आउट प्रकरण में राजस्थान सरकार और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बहुत किरकिरी हुई थी। ऐसे में गोपनीय फर्म को भुगतान किए जाने से पहले यह तथ्य तो रिकॉर्ड पर लिया जाना ही चाहिए कि आखिर उसकी कितनी गलती रही। 2 करोड़ 64 लाख रुपए का भुगतान बहुत बड़ा होता है। मैंने रिकॉर्ड मांग कर कोई गलती नहीं की - इंद्रराजसिंह पूर्व एफए, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

 
 


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