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विदेशी कंपनियों से कमीशन लेने वालों पर पीएमओ खामोश
Bhaskar News Tuesday, October 13, 2009 06:36 [IST]  

नई दिल्ली. भारत में ठेके हथियाने के लिए रिश्वत देने वाली विदेशी कंपनियों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की खामोशी मनमोहन सरकार के खिलाफ विपक्ष का नया हथियार साबित हो रही है। अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने पांच महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखकर सात ऐसी कंपनियों की जानकारी दी थी, जिन्होंने यह कबूल किया था कि उन्होंने अलग-अलग समय पर भारत में कॉन्ट्रैक्ट लेने के लिए उच्च अधिकारियों को रिश्वत दी।



इन कंपनियों ने भारतीय रेल, महाराष्ट्र राज्य विद्युत बोर्ड व भारतीय नौसेना जैसी अहम संस्थाओं के अधिकारियों को घूस देने की बात कबूली है। ये तमाम कंपनियां अमेरिका की फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट के तहत दोषी पाई गई थीं। दिलचस्प बात यह है कि इन कंपनियों ने जिस दौर में रिश्वत देने की बात कबूली है वह ज्यादातर एनडीए का कार्यकाल था, लेकिन भाजपा फिर भी भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ी है।



सबसे पहली कंपनी मारियो कोविनो ऑफ कंट्रोल कंपनीज है, जिसने महाराष्ट्र बिजली बोर्ड सहित चार देशों में गैर-कानूनी तरीके से दस लाख रुपए देने की बात कबूली। यह कंपनी उद्योगों के लिए वॉल्व बनाने का काम करती है। एक अन्य कंपनी वेबटेक ने अपने भारतीय उपक्रम पॉयनियर फ्रिक्षन के जरिए भारतीय रेल के अफसरों को करीब डेढ़ करोड़ की राशि रिश्वत में देने की बात मानी। यह भुगतान 2001 से 2005 के बीच किया गया।



तीसरी कंपनी अमेरिका की मशहूर शेर्क इंटरनेशनल कॉरपोरेशन जिसने अपनी कई उपक्रमों के नाम से अलग-अलग देशों में एयर कंडिशनिंग और रेफ्रिजरेशन जैसे कामों का ठेका लिया। इस कंपनी ने भारत में काम की देख-रेख के लिए एक एजेंट बहाल किया, जिसने 2001 से 2006 के बीच भारतीय नौसेना के अफसरों को एक लाख बत्तीस हजार डॉलर की रिश्वत दी। हालांकि एजेंट ने कबूल किया कि कोई भी भुगतान सौ डॉलर से ज्यादा का नहीं था। तीन अन्य कंपनियां जिन्होंने 2001 से 2006 के बीच भारतीय अधिकारियों को गैरकानूनी पेमेंट देने की बात स्वीकारी, उनमें डाओ केमिकल्स, टेक्सट्रॉन इंक व एटीकेआई शामिल है। गौरतलब है कि एटीकेआई के पूर्व प्रमुख चंद्रमौली श्रीनिवास एक भारतीय ही हैं।



डाओ केमिकल्स ने भारत में अपने उत्पादों को बेचने की अनुमति के बदले केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड के अफसरों को भारी रकम देने की बात कबूली। ये तमाम खुलासे अमेरिका में जारी सरकारी रिपोर्ट में दर्ज हैं। राजदूत मीरा शंकर ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट 12 मई को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टीकेए नायर को लिखे पत्र में भेजी थी। भाजपा ने सवाल किया है कि इतने विस्तृत ब्योरे के बावजूद पीएम ने अब तक रिश्वत लेने वाली अधिकारियों की जांच व उनपर कार्रवाई क्यों नहीं की।

 
 


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