मामला पकड़ा, केस कैसे बने
मामला पकड़ा, केस कैसे बने
भास्कर न्यूज Tuesday, October 13, 2009 07:33 [IST]  

जोधपुर. रसद विभाग ने डेयरी बूथों पर आनन फानन में आटा बेचने की शुरुआत तो कर दी, लेकिन बूथ संचालकों के पास प्राधिकार—पत्र नहीं होने से वितरण कार्य में होने वाली अनियमितता रोकने में विभाग लाचार नजर आ रहा है।बीते गुरुवार को दो डेयरी बूथों पर रसद विभाग की टीम ने जांच की, जहां दस-दस किलो के 21 आटे के बैग को लेकर अनियमितता पाए जाने पर उनके खिलाफ मौका फर्द तो बना दी, लेकिन इन बूथ संचालकों के पास प्राधिकार-पत्र नहीं होने से इनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर भ्रम की स्थिति है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के प्रावधानों में स्पष्ट है कि प्राधिकार पत्रधारी उसकी शर्तो का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ केस दर्ज कर कार्यवाही की जाती है। गत गुरुवार रेलवे स्टेशन के निकट बूथ संख्या 502 पर दस आटे के बैग तथा प्रताप नगर स्थित बूथ संख्या 499 पर 9 आटे के बैग रजिस्टर में इंद्राज कम पाए गए। जांच टीम ने इस संबंध में पूछताछ की तो दोनों बूथ संचालक संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाए। इन परिस्थितियों को देखते हुए रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी हरलाल विश्नोई ने मौका फर्द बनाकर रसद अधिकारी के समक्ष केस प्रस्तुत कर दिया। लेकिन बूथ संचालक के प्राधिकार- पत्र नहीं होने से मामला अटक गया है। दरसल सरकार ने सरस डेयरी के नाम से सिंगल प्राधिकार =पत्र दिया है। जबकि वितरण कार्य दो सौ से ज्यादा बूथों पर अलग अलग सिस्टम से हो रहा है।


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