भोपाल. सोमवार को पुष्य नक्षत्र में राजधानी के बाजारों में अच्छी-खासी खरीदारी की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन, कपड़े आदि सामानों की बिक्री में 30 से 40 फीसदी उछाल आया वहीं सराफा बाजार में सामान्य दिनों से 25 फीसदी ज्यादा लोगों ने खरीदारी की। नए शहर के न्यूमार्केट, दस नंबर के अलावा पुराने शहर के बाजारों में ग्राहकों की संख्या काफी देखी गई।
जेवर: सोमवार को सोना 1610 रुपए प्रतिग्राम और चांदी 26 हजार 800 रुपए प्रतिकिलो तक पहुंचने के बावजूद राजधानी की 500 दुकानों में कुल 16 करोड़ रुपए से अधिक कारोबार होने का अनुमान लगाया गया है। शुभ मुहूर्त में लोगों ने राशि के मुताबिक नग भी खरीदे।
कपड़ा: न्यूमार्केट, बैरागढ़, भेल सहित अन्य बाजारों में करीब आठ हजार कपड़ा दुकानों से दो करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी हुई। रेडिमेड बाजार में बच्चों के कपड़ों की सबसे अधिक मांग रही। वहीं बेडशीट, चादरें और परदे की भी डिमांड रही। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने अपनी पसंद के कपड़े खरीदे।
बर्तन: शुभ मुहूर्त पर लोगों ने स्टील और पीतल के बर्तनों में ज्यादा रुचि दिखाई। बैरागढ़ बर्तन बाजार में स्टील के ग्लास, जग, पानी की टंकी से लेकर पीतल के घड़ों तक की खरीदारी की गई। राजधानी में बैरागढ़ सहित बर्तनों की 200 से अधिक दुकानें हैं, जहां कुल एक करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स: आधुनिक जमाने के हिसाब से लोगों ने इलेक्ट्रॉनिक्स आइटमों की खरीदारी की। एलसीडी टीवी, होम थियेटर-सीडी प्लेयर के अलावा घरेलू आटा चक्कियों ने लोगों खासा प्रभावित किया। सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में व्यापार डेढ़ करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने का अनुमान लगाया गया है।
यातायात व्यवस्था बिगड़ी
बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़े लोग कई जगहों पर यातायात में उलझे, वहीं वाहन पार्किग के लिए भी जूझना पड़ा। पुराना शहर के सराफा चौक में जाने के लिए लोगों को वाहन यूनानी शफाखाना और सुल्तानिया रोड पर पार्क करना पड़ा। लखेरापुरा, आजाद मार्केट, मदीना प्रेस रोड, लोहा बाजार और जुमेराती में यातायात और पार्किग की स्थिति और भी बेकार रही।
नए शहर के न्यूमार्केट की मुख्य सड़क का पार्किग स्थल वाहनों से खचाखच भरा रहा। जब लोग खरीदारी कर वापस लौटे तो उन्हें अपने वाहन निकालने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ी। दस नंबर व एमपी नगर के बाजारों में भी भीड़ के कारण लोगों को परेशानी उठाना पड़ी। बाजारों में यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने की बजाय पुलिसकर्मी कंट्रोल रूम, जिंसी व अन्य चौराहों पर वाहन चौकिंग में अधिक रुचि लेते दिखाई दिए।