श्रीगंगानगर. बांधों की स्थिति कमजोर होने से रबी सीजन में भाखड़ा और आईजीएनपी के अलावा गंगनहर सिंचित क्षेत्र में भी बिजाई रकबा घटने की आशंका है।
पौंग व रणजीत सागर बांध में अपेक्षित भराव नहीं होने से गंगनहर को रबी सीजन में औसतन 1400 क्यूसेक पानी मिलने की संभावना है। इससे बिजाई क्षेत्र रबी व आगामी खरीफ में नरमा-कपास की बिजाई का क्षेत्र सिमटने की आशंका है। जल संसाधन विभाग का आंकलन है कि 21 सितंबर 09 से 20 मई 2010 तक डिप्लीशन अवधि में गंगनहर को कुल 3 लाख 39 हजार 800 क्यूसेक डेज पानी मिल सकेगा।
इस हिसाब से प्रतिदिन औसतन 1400 क्यूसेक पानी उपलब्ध होगा। बीकानेर (गंगनहर) का शेयर पौंग व रणजीत सागर बांध में है। पौंग बांध में गत वर्ष की अपेक्षा 51 फुट व रणजीत सागर में 15 मीटर कम भराव है। भंडारण की दृष्टि से पौंग बांध में 2.11 एमएएफ और रणजीत सागर में 0.4 एमएएफ पानी है।
यह दोनों बांधों की अधिकतम भराव क्षमता का क्रमश: 45 प्रतिशत व 25 प्रतिशत है। गत वर्ष अक्टूबर से अप्रैल तक औसतन 2200 से 2500 क्यूसेक पानी मिला था। वर्तमान रबी के सीजन में उपलब्ध पानी गत वर्ष की अपेक्षा काफी कम है। इसका सीधा प्रभाव बिजाई पर पड़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
अब ज्यादा पानी, फिर करवानी पड़ेगी कटौती: अक्टूबर में गंगनहर के लिए 1600 क्यूसेक पानी लिया जा रहा है जो कि औसत शेयर 1400 क्यूसेक से 200 क्यूसेक अधिक है। इस पानी की अगले महीनों में कटौती करवानी पड़ेगी। जल संसाधन विभाग के सूत्रों ने बताया कि अक्टूबर में सरसों की बिजाई के दृष्टिगत 200 क्यूसेक अतिरिक्त पानी लिया गया है। सीमित मात्रा में पानी उपलब्ध होने के दृष्टिगत नवंबर व दिसंबर में जरूरत के अनुसार शेयर घटा या बढ़ा लिया जाएगा।
तीन में से मिलेगी एक बारी: गंगनहर में 1400 क्यूसेक पानी मिलने की स्थिति में तीन बारियों में एक बारी ही किसानों को मिल पाएगी। करीब 20-21 दिन बाद पानी मिलने से समय पर बिजाई नहीं हो सकेगी।