स्किन कलर टैनिंग के कारण तो स्किन का रंग बदलता है, लेकिन इसके अलावा अगर आपकी स्किन का रंग बदल रहा है तो उसके पीछे मौसमी बदलाव भी कारण हो सकता है। गायनीकोलॉजिस्ट डॉ नीरा गोयल बताती हैं कि अगर स्किन के कलर में ज्यादा बदलाव हो रहे हैं तो इसके पीछे सही डाइट न लेना भी कारण हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से अवश्य संपर्क करें। इसके अलावा कई बार महिलाओं को इंसैक्ट बाइट्स या किसी खाने से एलर्जी के कारण रेशेज हो सकते हैं। रेशेज वायरल इंफैक्शन के कारण भी हो सकते हैं। कुछ रेशेज कुछ ही दिनों में खत्म हो जाते हैं, लेकिन डॉक्टर्स की सलाह लेना जरूरी है। ज्यादातर महिलाओं के बाल 30 साल की उम्र के बाद सफेद होने शुरू होते हैं। इससे पहले आपको अगर ऐसी प्रॉब्लम हो रही हैं तो इसके पीछे कई तरह की हैल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। डाइटिशियन डॉ. शिवाली मल्होत्रा बताती हैं कि ज्यादातर महिलाओं को यह समस्या एनिमिया, थायराइड या विटामिन-बी-12 की कमी के कारण हो सकती है। इसके अलावा ज्यादातर महिलाओं की डाइटिंग करने की आदत भी उनके बालों पर बुरा असर डालती है। डाइटिंग के कारण शरीर में न्यूट्रियंट्स व प्रोटीन की मात्रा में कमी हो जाती है, जिससे हेयर लॉस की समस्या बढ़ जाती है। इसके पीछे विटामिन की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकता है। अपने नाखूनों के रंग पर भी ध्यान दें। अगर नाखून पीले हो रहे हैं तो हो सकता है कि आपको लंग डिजीज, डायबिटीज या किडनी प्रॉब्लम हो। इसके अलावा नेल्स में फंगल इंफैक्शन होने का खतरा भी रहता है। फंगल इंफैक्शन के कारण नाखूनों पर व्हाइट स्पॉट या दर्द हो सकता है, खास कर यह समस्या पैरों के नाखूनों पर होती है। इनका भी खास ख्याल रखें। सही डाइट न होने की वजह से नाखून कमजोर होने लगते हैं और टूट भी सकते हैं।
हमेशा वजन के लिए चिंतित रहने वाली महिलाओं को नाखून, बाल और स्किन की सही देख्रभाल करना भी जरूरी है। पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए महिलाओं को सही डाइट लेना ही काफी नहीं हैं। बदलते लाइफस्टाइल ने महिलाओं को काफी बिजी कर दिया है। ऐसे में खुद की ज्यादा केयर करने की जरूरत है। हम जो भी खाते हैं उनका असर इन बॉडी पार्ट्स पर दिखता है और इन्हीं से कई तरह की हैल्थ प्रॉब्लम का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर्स के मुताबिक छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
बाल

नाखूनों का रंग बताता है हैल्थ