गांवों और कस्बों में तीज-त्योहार पर टूरिंग टॉकीज वाले कैंप लगाते रहे हैं। हमारे यहां वर्ष भर में जितनी सार्वजनिक छुट्टियां होती हैं, उतनी छुट्टियां दुनिया में किसी भी देश में नहीं होतीं। हाल ही में बेचारे शशि थरूर को यह कहना महंगा पड़ा कि कर्म को समर्पित महात्मा गांधी के जन्मदिन पर छुट्टी नहीं काम करना चाहिए। हमारे यहां बहुत कम लोग अपने शौक से काम करते हैं। काम नहीं करने के मौलिक बहाने खोजने में हमारा मुकाबला कोई देश नहीं कर सकता। एक जमाने में भोपाल में काहिल क्लब हुआ करता था, जिसमें लेटा हुआ सदस्य बैठे हुए को और बैठा हुआ खड़े सदस्य को चाय लाने के लिए कह सकता था। कुछ चैंपियन क्लब में डाइव लगाकर ही प्रवेश करते थे। इस तरह के क्लब नहीं होने पर कमोबेश यही मिजाज सारे भारत का है। सोचिए कुछ लोगों के कर्मठ होने से इतनी प्रगति है और अगर सारे पिल पड़ें, तो क्या होगा? इस वर्ष दीपावाली पर तीन फिल्मों का प्रदर्शन होने जा रहा है। सलमान खान-करीना कपूर अभिनीत ‘मैं और मिसेज खन्ना’, अक्षय कुमार-संजय दत्त अभिनीत ‘ब्लू’ और अजय देवगन-संजय दत्त अभिनीत ‘ऑल द बेस्ट’। इसमें से पहली पारिवारिक प्रेम कथा है, दूसरी एक्शन और तीसरी हास्य फिल्म है। इनमें से दो फिल्में नए निर्देशकों की हैं, जो अपना कॅरियर शुरू करने जा रहे हैं। सलमान खान ‘वांटेड’ की सफलता की लहर पर सवार हैं और अक्षय कुमार की विगत कुछ फिल्में आशा के अनुरूप सिद्ध नहीं हो पाईं। संजय दत्त की मुन्नाभाई श्रंखला के अतिरिक्त कोई फिल्म नहीं चली है। अजय देवगन ने अपनी अभिनय यात्रा एक्शन फिल्म से शुरू की थी, परंतु प्रकाश झा की फिल्मों में उन्होंने संजीदा किरदार प्रभावोत्पादक ढंग से निभाए और संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में कमाल का अभिनय किया। सलमान खान और अजय देवगन ‘लंदन ड्रीम्स’ में साथ आ रहे हैं। बहरहाल भारत में सभी तरह की फिल्मों के लिए पर्याप्त संख्या में दर्शक उपलब्ध हैं और फिल्में सांड़ों की तरह एक-दूसरे से नहीं टकरातीं। कुछ वर्ष पूर्व प्रेम कहानी ‘दिल’ और एक्शन फिल्म ‘घायल’ एक ही दिन प्रदर्शित होकर सफल रहीं थीं। वैसे भी हमारे यहां प्रेम कहानी में एक्शन होता है और एक्शन फिल्म में कॉमेडी होती है और हास्य फिल्म में भी प्रेम कहानी होती है। कुछ निर्माता तो बाकायदा गिनकर कुछ दृश्यों के बाद हास्य और कुछ के बाद गीत रखते हैं। यहां तक कि सुपरहिट गाना बन जाता है, तो उसके लिए सिचुएशन ठूंस दी जाती है। थालीनुमा भारतीय फिल्मों में अनेक कटोरियां, अचार, पापड़ इत्यादि चीजें होती हैं। उत्सव के मूड में इजाफा करने वाली फिल्म ज्यादा चलती है।
दुनिया के सभी देशों में महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव के समय फिल्मों का व्यवसाय जबरदस्त होता है। दीपावली, क्रिसमस और ईद पर भव्य फिल्मों के प्रदर्शन की योजना काफी पहले बनाई जाती है। हॉलीवुड में क्रिसमस और नए वर्ष के दिनों में औसत से दोगुना व्यवसाय होता है। भारत में दीपावली पर विगत अनेक वर्षो से शाहरुख खान अभिनीत फिल्में लगती रही हैं, परंतु इस वर्ष करण जौहर की फिल्म फरवरी तक ही तैयार होगी। भारत में बॉक्स ऑफिस पर बहार का मौसम दो बार आता है- जून से अगस्त एवं दीपावाली से जनवरी तक। सिनेमा हमारी उत्सवप्रियता का ही एक हिस्सा है।